धार्मिक शिक्षा संस्थानों पर निगरानी की मांग: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा फ़ैसला…

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने 14 साल से कम उम्र के बच्चों को धार्मिक या सामान्य शिक्षा देने वाले संस्थानों के रजिस्ट्रेशन और निगरानी की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार को फैसला लेने को कहा है। अदालत ने केंद्र को चार हफ्ते में याचिकाकर्ता के प्रतिनिधित्व पर निर्णय लेने का निर्देश दिया।

सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका में मांग की गई थी कि देशभर में 14 साल से कम उम्र के बच्चों को धार्मिक या सामान्य शिक्षा देने वाले सभी संस्थानों का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन, मान्यता और मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। याचिका भाजपा नेता और वकील अश्वनी कुमार उपाध्याय की ओर से दाखिल की गई थी।

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि पहले केंद्र सरकार इस मामले पर फैसला ले। कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता द्वारा शिक्षा मंत्रालय को दिए गए प्रतिनिधित्व पर उचित निर्णय लेकर इसकी जानकारी दे।

याचिका में दावा किया गया था कि कई सीमावर्ती इलाकों में बिना मान्यता वाले संस्थान चल रहे हैं, जहां बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और पाठ्यक्रम की निगरानी नहीं हो रही। साथ ही संविधान के अनुच्छेद 21A, 39(f), 45 और 51A(k) का हवाला देते हुए कहा गया कि बच्चों के लिए राज्य की निगरानी जरूरी है।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मामले में कोई सीधा आदेश देने से इनकार करते हुए कहा कि कार्यपालिका की भी जिम्मेदारी है और पहले केंद्र सरकार को इस विषय पर विचार करने दिया जाए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *