रायपुर। सूर्य के उत्तरायण होने के पावन अवसर मकर संक्रांति पर छत्तीसगढ़ की धरती भक्ति और श्रद्धा से सराबोर हो उठी। गरियाबंद जिले स्थित राजिम त्रिवेणी संगम में तड़के ब्रह्ममुहूर्त से ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों के संगम में आस्था की डुबकी लगाकर श्रद्धालुओं ने पुण्य लाभ अर्जित किया और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
शास्त्रों में वर्णित मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति पर किया गया स्नान, दान और जप विशेष फलदायी माना जाता है। इसी विश्वास के साथ श्रद्धालुओं ने तिल, गुड़ और अन्न का दान किया। संगम तट पर “हर-हर गंगे” और “जय मां राजिम” के जयघोष गूंजते रहे।
राजधानी रायपुर में भी मकर संक्रांति का पर्व पूरी धार्मिक गरिमा के साथ मनाया गया। शहर के पांच प्रमुख स्थानों पर विशेष पूजा-अर्चना, हवन और भजन-कीर्तन के आयोजन हुए। अयप्पा मंदिर में भव्य दीपोत्सव का आयोजन किया गया, जहां सैकड़ों दीप प्रज्वलित कर श्रद्धालुओं ने भगवान अयप्पा से सुख, शांति और आरोग्य की कामना की। दीपों की पंक्तियों से मंदिर परिसर अलौकिक प्रकाश से जगमगा उठा।
वहीं बलरामपुर जिले में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मकर संक्रांति के पावन अवसर पर तपेश्वर महादेव मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना करेंगे। पूजा के पश्चात वे बच्चों के साथ पतंग उड़ाकर पर्व की खुशियों में सहभागी बनेंगे, जिससे धार्मिक परंपरा के साथ सामाजिक सौहार्द का संदेश भी जाएगा।
मकर संक्रांति पर पूरे प्रदेश में स्नान-दान, पूजा-पाठ, खिचड़ी प्रसाद और पतंग उत्सव के माध्यम से धर्म, आस्था और लोक परंपराओं का सुंदर समागम देखने को मिला। यह पर्व न केवल आध्यात्मिक उन्नयन का अवसर है, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना को भी सुदृढ़ करता है।