सुब्रत रॉय के बाद भी जारी है सहारा का पैसा लौटाने का सिलसिला, जानिए आखिर किसके जरिए मिल रहा रिफंड…

करोड़ों निवेशकों के फंसे पैसे वापस दिलाने के लिए केंद्र सरकार ने बनाया CRCS-सहारा रिफंड सिस्टम, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही प्रक्रिया

नई दिल्ली। सहारा समूह में पैसा लगाने वाले लाखों निवेशकों के लिए रिफंड की प्रक्रिया लगातार जारी है। सहारा इंडिया के प्रमुख रहे सुब्रत रॉय का नवंबर 2023 में निधन हो चुका है, लेकिन निवेशकों का पैसा लौटाने की प्रक्रिया उनके निधन के बाद भी रुकी नहीं। सवाल यह है कि आखिर अब निवेशकों को उनका पैसा कौन लौटा रहा है?

दरअसल, सहारा समूह की चार मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसायटियों के वास्तविक जमाकर्ताओं को पैसा वापस करने के लिए केंद्र सरकार ने CRCS-सहारा रिफंड पोर्टल शुरू किया है। यह प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत संचालित हो रही है।

चार सहकारी समितियों के जमाकर्ताओं के लिए है व्यवस्था

रिफंड की यह व्यवस्था सहारा समूह की चार सहकारी समितियों के पात्र जमाकर्ताओं के लिए है। इनमें Sahara Credit Cooperative Society Limited, Saharayan Universal Multipurpose Society Limited, Humara India Credit Cooperative Society Limited और Stars Multipurpose Cooperative Society Limited शामिल हैं।

यानी यह सीधे सुब्रत रॉय या उनके परिवार की ओर से किया जा रहा भुगतान नहीं है। पात्र निवेशकों के दावों की जांच और सत्यापन के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत पैसा लौटाया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुआ था पोर्टल

29 मार्च 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने सहारा-सेबी रिफंड खाते से राशि निकालकर वास्तविक जमाकर्ताओं को भुगतान करने की व्यवस्था का रास्ता साफ किया था। इसके बाद 18 जुलाई 2023 को CRCS-सहारा रिफंड पोर्टल शुरू किया गया।

इस पूरी प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त व्यवस्था के तहत दावों का निपटारा किया जा रहा है। पात्र जमाकर्ताओं के सत्यापन के बाद पैसा उनके आधार से जुड़े बैंक खाते में भेजा जाता है।

अब तक कितने लोगों को मिला पैसा?

सरकार की ओर से संसद में दी गई जानकारी के मुताबिक फरवरी 2026 तक सहारा रिफंड पोर्टल पर करीब 1.45 करोड़ आवेदन और 4.06 करोड़ दावे किए गए थे। इनमें से 40,33,448 निवेशकों को कुल 8,783.55 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका था।

इससे साफ है कि रिफंड का काम किसी एक व्यक्ति के हाथ में नहीं है, बल्कि सरकार द्वारा बनाए गए संस्थागत सिस्टम के जरिए दावों की जांच और भुगतान किया जा रहा है।

जिनके दावे में कमी रह गई, उनके लिए दोबारा मौका

ऐसे निवेशक जिनके आवेदन में दस्तावेजों या अन्य जानकारी से जुड़ी कमी पाई गई थी अथवा जिनका भुगतान पहले नहीं हो सका, उनके लिए CRCS-सहारा रिफंड पोर्टल का री-सबमिशन सिस्टम भी उपलब्ध कराया गया है। पात्र जमाकर्ता आवश्यक सुधार के बाद अपना दावा दोबारा जमा कर सकते हैं।

हालिया व्यवस्था में 10 लाख रुपये तक के दावों के री-सबमिशन की प्रक्रिया को भी सरल किया गया है और ऐसे दोबारा जमा किए गए दावों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रोसेस करने की बात कही गई है।

रिफंड के लिए किन चीजों की जरूरत पड़ सकती है?

दावे की प्रक्रिया में जमाकर्ता को अपनी सदस्यता और जमा से संबंधित जानकारी देनी होती है। इसमें सदस्यता संख्या, जमा खाता संख्या, आधार से लिंक मोबाइल नंबर तथा जमा प्रमाणपत्र या पासबुक जैसी जानकारी महत्वपूर्ण है। 50 हजार रुपये या उससे अधिक के कुल दावे के लिए PAN की जानकारी भी अनिवार्य बताई गई है।

कुल मिलाकर सुब्रत रॉय के निधन के बाद सहारा निवेशकों के रिफंड का सवाल खत्म नहीं हुआ है। अब पात्र जमाकर्ताओं के पैसे लौटाने की प्रक्रिया CRCS-सहारा रिफंड पोर्टल और संबंधित सरकारी व्यवस्था के जरिए चल रही है। सरकार के अनुसार भुगतान वास्तविक दावेदारों की पहचान और जमा राशि के प्रमाण के सत्यापन के बाद सीधे उनके आधार-सीडेड बैंक खातों में किया जा रहा है।

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