मोखा पर कब्जे के दौरान कथित AI ऑडियो वायरल, तारेक सालेह की आवाज में सैनिकों को पीछे हटने का संदेश; लाल सागर के करीब रणनीतिक बढ़त से बढ़ी चिंता
यमन, 12 सितंबर 2026। यमन में हूती लड़ाकों और नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेज (NRF) के बीच जारी संघर्ष के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कथित इस्तेमाल ने युद्ध के तरीके को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आरोप है कि हूतियों ने नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेज के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल तारेक सालेह की आवाज को AI की मदद से क्लोन कर एक ऑडियो तैयार किया और उसे सैनिकों के बीच प्रसारित किया। इस कथित रिकॉर्डिंग में सैनिकों को पीछे हटने का निर्देश दिया गया था।
मोखा पर कब्जे के बीच सामने आया AI ऑडियो
रिपोर्टों के मुताबिक, 11 सितंबर को हूती लड़ाकों और NRF के बीच भीषण संघर्ष के दौरान तारेक सालेह की आवाज में एक ऑडियो रिकॉर्डिंग प्रसारित हुई। इसमें सैनिकों को युद्ध की स्थिति को देखते हुए पीछे हटने और दुश्मन को खुले इलाके में निशाना बनाने की बात कही गई थी।
NRF की ओर से आरोप लगाया गया कि यह तारेक सालेह की असली आवाज नहीं थी, बल्कि AI तकनीक से तैयार की गई क्लोन आवाज थी। उद्देश्य सैनिकों को भ्रमित करना और उनका मनोबल कमजोर करना बताया गया।
हालांकि, इस ऑडियो के AI से बनाए जाने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मोखा स्थित अलजौम्हौरिया टीवी ने भी इसे हूतियों की ओर से मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश बताया, लेकिन इसे एक असफल प्रयास करार दिया।
मोखा क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
मोखा यमन के लाल सागर तट पर स्थित रणनीतिक बंदरगाह है। यह बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के करीब है, जो लाल सागर और हिंद महासागर के बीच अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है।
हूतियों के मोखा पर कब्जे को उनकी हालिया बड़ी जमीनी बढ़त के तौर पर देखा जा रहा है। इससे लाल सागर के समुद्री मार्गों और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
तारेक सालेह कौन हैं?
लेफ्टिनेंट जनरल तारेक सालेह यमन की नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेज के प्रमुख हैं। वह यमन के पूर्व राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह के भतीजे हैं।
NRF एक हूती विरोधी सैन्य संगठन है। पहले इसे संयुक्त अरब अमीरात का समर्थन हासिल था और बाद में इसके सऊदी अरब के साथ भी संबंध मजबूत हुए।
AI का इस्तेमाल सिर्फ आवाज तक सीमित होने का दावा नहीं
इस पूरे घटनाक्रम के बीच AI के सैन्य इस्तेमाल को लेकर एक और रिपोर्ट सामने आई है। AI कंपनी Anthropic की एक थ्रेट इंटेलिजेंस रिपोर्ट में उत्तरी यमन में एक समूह द्वारा उसके Claude AI मॉडल का इस्तेमाल निर्देशित मिसाइलों के लिए सॉफ्टवेयर विकसित करने में किए जाने की बात कही गई है। रिपोर्ट ने सीधे हूती संगठन का नाम नहीं लिया, लेकिन उपलब्ध परिस्थितियों के आधार पर इसे हूतियों से जोड़कर देखा जा रहा है।
युद्ध में बढ़ रहा है ‘डिजिटल भ्रम’ का खतरा
अगर तारेक सालेह की आवाज वाले ऑडियो में AI क्लोनिंग की बात सही साबित होती है, तो यह दिखाता है कि आधुनिक युद्ध में हथियारों और ड्रोन के साथ-साथ डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए भी किया जा सकता है।
किसी सैन्य कमांडर की आवाज की नकल कर फर्जी आदेश फैलाना सैनिकों के बीच भ्रम पैदा कर सकता है। हालांकि, इस मामले में ऑडियो के वास्तविक प्रभाव और AI से तैयार होने की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।
मोखा पर हूतियों की बढ़त इसलिए भी अहम है क्योंकि यह इलाका बाब-अल-मंदेब के बेहद करीब है। ऐसे में यमन का यह संघर्ष केवल स्थानीय सैन्य लड़ाई तक सीमित नहीं रहकर लाल सागर और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए भी महत्वपूर्ण बन सकता है।