घने जंगल में स्थित हाकड़ी पाठ मंदिर में महाशिवरात्रि मेले की तैयारी तेज
डौंडीलोहारा। क्षेत्र के घने जंगल में स्थित हाकड़ी पाठ मंदिर वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। प्राकृतिक सौंदर्य से घिरे इस मंदिर की ख्याति आसपास के गांवों तक सीमित नहीं, बल्कि दूर-दराज क्षेत्रों तक फैली हुई है। मंदिर ग्राम रेंगाडबरी से लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जहां तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को घने जंगल और कच्चे रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है, फिर भी उनकी आस्था में कोई कमी नहीं देखी जाती।
इस वर्ष 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर परिसर में भव्य मेले का आयोजन किया जाएगा, जिसकी तैयारियां जोरों पर हैं। स्थानीय जनमान्यताओं के अनुसार मंदिर में विराजमान बाबा गंद सिंह की कृपा से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मंदिर के पुजारी मोहरन रावटे वर्षों से परंपरागत रूप से पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं।
श्रद्धालु अपनी मन्नत पूरी होने पर मंदिर पहुंचकर नारियल, अगरबत्ती और मिट्टी के घोड़े चढ़ाकर श्रद्धा व्यक्त करते हैं। मंदिर की एक विशेष पहचान यह भी है कि यहां अनेक देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं।
श्रद्धालु परिवार सहित दर्शन-पूजन के लिए आते हैं। खासकर त्योहारों, अमावस्या और विशेष धार्मिक अवसरों पर यहां भारी भीड़ उमड़ती है, जिससे पूरा जंगल क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूब जाता है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि हाकड़ी पाठ मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान भी है।