फिजिकल हेल्थ अलर्ट:
आर्टिफिशियल स्वीटनर्स से ब्रेन जल्दी बूढ़ा होने का खतरा, ‘शुगर-फ्री’ के अंधाधुंध इस्तेमाल से सावधान रहने की सलाह
स्वास्थ्य। हालिया मेडिकल रिसर्च और डॉक्टरों की चेतावनी के मुताबिक, बाजार में तेजी से लोकप्रिय हो रहे ‘शुगर-फ्री’ और आर्टिफिशियल स्वीटनर्स का अधिक और लंबे समय तक सेवन दिमाग की उम्र को तेजी से बढ़ा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि वजन घटाने और डायबिटीज़ कंट्रोल के नाम पर इस्तेमाल किए जा रहे ये विकल्प पूरी तरह सुरक्षित नहीं माने जा सकते।
डॉक्टरों के अनुसार, आर्टिफिशियल स्वीटनर्स जैसे एस्पार्टेम, सैकरिन, सुक्रालोज और एसल्फेम-K का नियमित सेवन करने वाले लोगों में याददाश्त कमजोर होना, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी और सोचने-समझने की क्षमता में गिरावट देखी गई है।
रिसर्च में क्या सामने आया?
एक बड़े अध्ययन में हजारों वयस्कों को कई वर्षों तक ट्रैक किया गया। अध्ययन में पाया गया कि जो लोग नियमित रूप से शुगर-फ्री ड्रिंक्स और प्रोसेस्ड फूड लेते हैं, उनमें
दिमागी कार्यक्षमता में तेजी से गिरावट
ब्रेन एजिंग लगभग 1.5 से 2 साल तक तेज,
कॉग्निटिव डिक्लाइन का जोखिम ज़्यादा,
विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रभाव सीधे नहीं, बल्कि गट-ब्रेन एक्सिस और न्यूरो-इन्फ्लेमेशन के जरिए पड़ सकता है।
डॉक्टरों की राय:
सीनियर चिकित्सकों का कहना है कि आर्टिफिशियल स्वीटनर्स ब्लड शुगर को तुरंत नहीं बढ़ाते, इसलिए इन्हें डायबिटीज़ में सुरक्षित समझा जाता रहा है। लेकिन नई स्टडीज़ यह संकेत दे रही हैं कि लंबे समय तक इनका सेवन दिमागी स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि अभी यह नहीं कहा जा सकता कि ये सीधे बीमारी का कारण हैं, लेकिन जोखिम को नज़रअंदाज़ करना खतरनाक हो सकता है।
किन उत्पादों में ज्यादा खतरा?
विशेषज्ञों के अनुसार, आर्टिफिशियल स्वीटनर्स केवल डायट सोडा तक सीमित नहीं हैं। ये पाए जाते हैं-
शुगर-फ्री कोल्ड ड्रिंक्स
लो-कैलोरी डेज़र्ट
शुगर-फ्री च्युइंग गम
पैक्ड और प्रोसेस्ड फूड
डाइट सप्लीमेंट्स
इसलिए उपभोक्ताओं को फूड लेबल ध्यान से पढ़ने की सलाह दी गई है।
हेल्थ एक्सपर्ट्स की सलाह:
1, शुगर-फ्री उत्पादों का नियमित सेवन न करें
2, मिठास के लिए प्राकृतिक विकल्प सीमित मात्रा में अपनाएं
3, संतुलित आहार, नींद और व्यायाम पर ध्यान दें
4, डायबिटीज़ या अन्य बीमारियों में डॉक्टर की सलाह से ही स्वीटनर लें।
कुल मिलाकर विशेषज्ञों का कहना है कि ‘शुगर-फ्री’ का मतलब पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। वजन और शुगर कंट्रोल के नाम पर आर्टिफिशियल स्वीटनर्स का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल भविष्य में दिमागी स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम बन सकता है। सावधानी और संतुलन ही सबसे सुरक्षित उपाय है।