ईरान युद्ध और समुद्री नाकेबंदी का असर: कच्चे तेल की सप्लाई घटी, कई देशों में पेट्रोल-डीजल संकट गहराने की आशंका; कीमतों में भारी उछाल संभव
ईरान से बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी संकट ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो वैश्विक तेल भंडार तेजी से खत्म हो सकते हैं और कई देशों में ऊर्जा संकट गहरा सकता है।
दरअसल, होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल व्यापार मार्गों में से एक है। दुनिया के कुल समुद्री तेल कारोबार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। मौजूदा संघर्ष और जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से तेल सप्लाई चेन पर सीधा असर पड़ा है।
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के प्रमुख फातिह बिरोल ने चेतावनी दी है कि वैश्विक कमर्शियल ऑयल स्टॉक बेहद तेजी से घट रहे हैं। उनके मुताबिक, मौजूदा हालात में दुनिया के पास केवल कुछ हफ्तों का सुरक्षित भंडार बचा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एशियाई देशों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है, क्योंकि भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश बड़े पैमाने पर खाड़ी देशों से तेल आयात करते हैं। सप्लाई बाधित होने पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी उछाल और महंगाई बढ़ने की आशंका है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, दुनिया भर में तेल भंडार रिकॉर्ड गति से घट रहे हैं। कई देशों ने अपने रणनीतिक तेल भंडार का इस्तेमाल शुरू कर दिया है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह राहत ज्यादा समय तक नहीं टिक पाएगी।