किताबों की जगह थमाया फावड़ा! सूरजपुर के DAV स्कूल में RTE बच्चों से कराई मज़दूर…

RTE बच्चों से स्कूल में मजदूरी का आरोप: सूरजपुर के DAV में सीमेंट-रेत ढुलाई और पुताई करवाई, हाईकोर्ट सख्त

सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के तिलसिवां स्थित मुख्यमंत्री डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाले आरटीई (शिक्षा का अधिकार) के तहत नामांकित गरीब बच्चों से निर्माण कार्य और पुताई कराए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। घटना उजागर होने के बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए शिक्षा सचिव से शपथपत्र के साथ जवाब तलब किया है।

परिजनों ने स्कूल प्रबंधन, खासकर प्रिंसिपल पर आरोप लगाया है कि आरटीई के तहत पढ़ रहे बच्चों से स्कूल परिसर में सीमेंट-रेत ढुलवाने, निर्माण सामग्री उठवाने और कक्षाओं की पुताई करवाई गई।

माता-पिता का कहना है कि बच्चों के हाथों में छाले पड़ गए, लेकिन विरोध करने पर उन्हें टीसी (ट्रांसफर सर्टिफिकेट) काटकर स्कूल से निकालने की धमकी दी गई।

परिजनों के अनुसार, जब उन्होंने इस बारे में स्कूल प्रशासन से शिकायत की तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। कुछ अभिभावकों का आरोप है कि उनसे कहा गया कि बच्चों को मुफ्त में पढ़ाई और सुविधाएं मिल रही हैं, इसलिए ज्यादा सवाल न करें।

मामले की गंभीरता को देखते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच-मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल-ने स्वतः संज्ञान में सुनवाई की।

कोर्ट ने शिक्षा सचिव को 11 मार्च तक शपथपत्र के साथ विस्तृत जवाब देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने इसे बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला बताया है।

बताया जा रहा है कि आरटीआई और जनहित याचिकाओं से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान यह मामला न्यायालय के संज्ञान में आया।

छत्तीसगढ़ सीएमओ की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर बयान जारी कर कहा गया कि सूरजपुर स्थित डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल, तिलसिवां में स्कूली बच्चों से श्रमदान कराए जाने का मामला अत्यंत गंभीर और संवेदनशील है।

सरकार ने निष्पक्ष एवं तथ्यात्मक जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच समिति गठित करने की जानकारी दी है। कहा गया है कि रिपोर्ट प्राप्त होते ही दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

अभिभावकों की मांग

परिजन चाहते हैं कि:

बच्चों से कराए गए श्रम की निष्पक्ष जांच हो

दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो

भविष्य में आरटीई छात्रों के साथ किसी तरह का भेदभाव या दबाव न बनाया जाए

यह मामला शिक्षा व्यवस्था, बच्चों के अधिकार और आरटीई कानून के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। अब सभी की नजरें जांच रिपोर्ट और हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं।

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