ईरान की मिसाइल ताकत अब भी बरकरार; होर्मुज संकट गहराया, अमेरिकी दावे पर उठे सवाल…

नई खुफिया रिपोर्ट में खुलासा- ईरान के अधिकांश मिसाइल लॉन्च साइट अब भी सक्रिय, युद्ध के बावजूद 70% सैन्य क्षमता बची होने का दावा।

अंतरराष्ट्रीय। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच एक नई खुफिया रिपोर्ट ने वॉशिंगटन के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के ज्यादातर मिसाइल लॉन्च ठिकाने अब भी सक्रिय हैं और उसकी सैन्य क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

ब्रिटिश मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान के पास अब भी युद्ध-पूर्व मिसाइल भंडार का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा मौजूद है। रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास मौजूद 33 में से करीब 30 मिसाइल साइट्स अब भी ऑपरेशनल हैं। इससे अमेरिका के उन दावों पर सवाल उठ रहे हैं जिनमें कहा गया था कि ईरान की मिसाइल क्षमता “लगभग खत्म” हो चुकी है।

दरअसल, अमेरिका और इजरायल ने पिछले महीनों में ईरान के सैन्य ठिकानों, मिसाइल डिपो और नौसैनिक अड्डों पर कई बड़े हमले किए थे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि ईरानी सैन्य ढांचे को “पूरी तरह तबाह” कर दिया गया है। लेकिन लीक हुई इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स और स्वतंत्र विश्लेषणों में अलग तस्वीर सामने आ रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान ने अपने मोबाइल लॉन्चर, भूमिगत मिसाइल बंकर और उत्पादन क्षमता को काफी हद तक सुरक्षित रखा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान लगातार अपनी मिसाइल क्षमता दोबारा तैयार कर रहा है और नई रणनीति के तहत छोटे लेकिन ज्यादा सटीक हमलों पर फोकस कर रहा है।

इस बीच Strait of Hormuz को लेकर संकट और गहरा गया है। यह दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ईरान ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर उस पर दबाव बढ़ा तो वह इस मार्ग को बंद कर सकता है। कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि युद्ध के बाद से यहां जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है।

हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज क्षेत्र में फिर तनाव बढ़ने की खबरें भी सामने आई हैं। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर सीजफायर उल्लंघन के आरोप लगाए हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि ईरान की मिसाइल क्षमता पूरी तरह खत्म न होने का मतलब है कि मध्य पूर्व में तनाव अभी लंबे समय तक जारी रह सकता है। खासतौर पर होर्मुज संकट के कारण वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर बड़ा असर पड़ने की आशंका बनी हुई है।

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