रायपुर। छत्तीसगढ़ के प्रख्यात हिंदी साहित्यकार और ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता विनोद कुमार शुक्ल का 23 दिसंबर 2025 को निधन हो गया। वे 88 वर्ष के थे और लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके परिवार ने बताया कि वे रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में इलाजरत थे, जहां उन्होंने शाम करीब 4:48 बजे अंतिम सांस ली। उनके निधन से हिंदी साहित्य जगत में भारी शोक की लहर दौड़ गई है।
विनोद कुमार शुक्ल का जन्म 1 जनवरी 1937 को छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में हुआ था। वे एक कवि, कथाकार और उपन्यासकार थे। उनकी लेखनी बहुत ही सरल, संवेदनशील और गहरी मानी जाती थी, जिसमें आम जीवन की सूक्ष्म भावनाओं को खूबसूरती से उभारा गया था।
उनकी कुछ चर्चित कृतियाँ थीं:
जय हिंद, पहला कविता संग्रह, नौकर की कमीज – उपन्यास, दीवार में एक खिड़की रहती थी – उपन्यास, खिलेगा तो देखेंगे – उपन्यास, एक चुप्पी, जगह – कथा
इन कृतियों ने हिंदी साहित्य में विशेष स्थान बनाया और पाठकों में आज भी लोकप्रिय हैं। उल्लेखनीय है कि ‘नौकर की कमीज’ पर फिल्म भी बनी थी, जिसे प्रसिद्ध फिल्मकार मणिकौल ने बनाया था।
शुक्ल जी को 2024 में 59वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था- यह भारत का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान है। वे छत्तीसगढ़ के पहले लेखक थे जिन्हें यह सम्मान मिला। इस पुरस्कार के मिलने के बाद भी वे कुछ समय तक अस्वस्थ रहे और फिर इसी वर्ष उनका देहांत हो गया।
अक्टूबर 2025 में शुक्ल जी को सांस लेने में कठिनाई हुई, जिसके बाद उन्हें पहले एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। कुछ दिन बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ और वे घर चले गए, लेकिन फिर 2 दिसंबर को उन्हें AIIMS, रायपुर में भर्ती करना पड़ा। हाल ही में उनकी तबियत और बिगड़ गई, और इसी बीच उनका देहांत हुआ। वे अपनी पत्नी, पुत्र (शशवत शुक्ल) और एक बेटी सहित परिवार के यादों में जीवित हैं। पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक उनके अंतिम संस्कार की तैयारियाँ उनके घर से शुरू होंगी और आगे विवरण परिवार की ओर से घोषित किए जाएंगे।
उनके निधन पर साहित्यकार, पाठक और नागरिकों में गहरा दुःख देखा जा रहा है। उनकी लेखनी और संवेदनशील शैली के लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा और हिंदी साहित्य की दुनिया ने एक महान हस्ती खो दी है।