कामधेनु विश्वविद्यालय भर्ती में बड़ा विवाद: बिना बैकलॉग भरे नया विज्ञापन, आरक्षण रोस्टर में अनियमितता, अनुसूचित-जनजाति आयोग से जांच की मांग
दुर्ग। कामधेनु विश्वविद्यालय (छत्तीसगढ़) में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर एक गंभीर भर्ती गड़बड़ी का आरोप सामने आया है, जिसे लेकर अभ्यर्थियों और सामाजिक संगठनों ने तीव्र चिंता जताई है।
मुख्य आरोप और समस्या क्या है?
विश्वविद्यालय ने पिछले बैकलॉग पदों को भरे बिना ही एक नया भर्ती विज्ञापन जारी किया, जिससे उन उम्मीदवारों को मौका नहीं मिला जो पहले के खाली पदों के लिए योग्य थे।
विज्ञापन में आरक्षण रोस्टर को सही तरीके से लागू नहीं किया गया, जिसमें अनुसूचित जनजाति और अन्य वर्गों के लिए निर्धारित पदों का सही बंटवारा नहीं दिखा। यह स्थिति सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ मानी जा रही है।
इस भर्ती प्रक्रिया पर कई अभ्यर्थियों ने आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है और राष्ट्रीय अनुसूचित-जनजाति आयोग (National Commission for Scheduled Tribes) से पूरी जांच कराने की मांग की है, ताकि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और संवैधानिक आरक्षण के नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके।
इस तरह की गड़बड़ियाँ केवल व्यक्तिगत नौकरी के अवसरों को प्रभावित नहीं करतीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों – जैसे कि अनुसूचित-जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों को आरक्षण देना – के मूल सिद्धांतों पर सवाल उठाती हैं. नियुक्ति प्रक्रिया का पारदर्शी और निष्पक्ष होना आवश्यक है ताकि संवैधानिक नियमों और सरकारी भर्ती दिशानिर्देशों का पालन हो सके।
अब मामला यह है कि अनुसूचित-जनजाति आयोग अगर जांच शुरू करता है, तो विश्वविद्यालय को अपनी भर्ती प्रक्रिया, रोस्टर गणना और विज्ञप्तियों पर स्पष्ट जवाब देना पड़ेगा। अगर सही रोस्टर लागू नहीं पाया गया, तो भर्ती रद्द या संशोधित भी हो सकती है।