यूपी में तीन नए डिजिटल पोर्टल लॉन्च, धारा 116 के मामलों से लेकर EWS प्रमाण पत्र और खतौनी तक की प्रक्रिया होगी आसान
लखनऊ, 12 सितंबर 2026। उत्तर प्रदेश में जमीन और राजस्व से जुड़े कामों को आसान बनाने के लिए राज्य सरकार ने डिजिटल व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब सह-खातेदारों के बीच जमीन के बंटवारे के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जा सकेगा। इसके लिए राजस्व परिषद ने तीन नए डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किए हैं। इससे लोगों को जमीन के विभाजन से जुड़े मामलों में बार-बार तहसील और दूसरे सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिलने की उम्मीद है।
धारा 116 के तहत जमीन बंटवारे की ऑनलाइन सुविधा
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 116 के तहत सह-खातेदार अपनी जमीन के विभाजन के लिए वाद दाखिल कर सकेंगे। नई व्यवस्था में आवेदन से लेकर आगे की प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है।
आवेदन के बाद नोटिस और उद्घोषणा की प्रक्रिया भी ऑनलाइन होगी। वहीं लेखपाल की रिपोर्ट भी पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाएगी। इससे मामले की प्रगति को डिजिटल माध्यम से देखा और मॉनिटर किया जा सकेगा।
जमीन की वास्तविक स्थिति भी देख सकेंगे
नई व्यवस्था में GIS तकनीक को भी शामिल किया गया है। इसके जरिए संबंधित भूमि की भौगोलिक स्थिति को डिजिटल नक्शे के माध्यम से देखने में मदद मिलेगी। जमीन के बंटवारे से जुड़े मामलों में खतौनी, संबंधित अभिलेख और नक्शे महत्वपूर्ण दस्तावेज होते हैं। डिजिटल व्यवस्था से इन प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने का प्रयास किया गया है।
EWS प्रमाण पत्र के लिए भी ऑनलाइन आवेदन
सरकार ने केवल जमीन के बंटवारे तक ही डिजिटल सुविधा सीमित नहीं रखी है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) प्रमाण पत्र के लिए भी ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था शुरू की गई है।
इस व्यवस्था में लेखपाल और तहसीलदार अपनी रिपोर्ट ऑनलाइन भेज सकेंगे। आवेदन किस स्तर पर पहुंचा है और उसकी क्या स्थिति है, इसकी जानकारी डिजिटल माध्यम से दर्ज और मॉनिटर की जा सकेगी। इससे प्रमाण पत्र जारी होने की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।
अब आसान तरीके से मिलेगी खतौनी की जानकारी
तीसरी सुविधा सरलीकृत खतौनी से जुड़ी है। इसमें जमीन के क्षेत्रफल को छह दशमलव स्थानों तक प्रदर्शित किया जाएगा। इससे खासकर छोटे भूखंडों के क्षेत्रफल की जानकारी अधिक स्पष्ट और सटीक तरीके से सामने आ सकेगी।
दाखिल-खारिज और पैमाइश की प्रक्रिया पर भी नजर
डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए जमीन के नामांतरण यानी दाखिल-खारिज, पैमाइश, बंटवारे और अन्य राजस्व मामलों की प्रक्रिया को भी ट्रैक करने की व्यवस्था की जा रही है। सरकार का उद्देश्य आवेदन से लेकर अंतिम निस्तारण तक पूरी प्रक्रिया को समयबद्ध और पारदर्शी बनाना है।
भागदौड़ और कागजी प्रक्रिया कम करने पर जोर
राजस्व परिषद की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल के अनुसार, तीनों डिजिटल सेवाओं से नागरिकों को राजस्व संबंधी कामों के लिए अनावश्यक भागदौड़ और कागजी प्रक्रिया से राहत मिलेगी। साथ ही जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बढ़ाने, अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और मामलों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।
सरकार की इस डिजिटल पहल का मकसद राजस्व विभाग की सेवाओं को नागरिकों के लिए अधिक सरल बनाना है, ताकि आवेदन और उसके निस्तारण के बीच की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट रहे और लोगों को छोटी-छोटी जानकारी के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।