आधार बना जीवन का आधार: कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी की पहल से वृद्ध कृषक की वर्षों पुरानी समस्या का निराकरण
-तकनीकी अड़चनों के बीच फँसा आधार हुआ अपडेट, 75 वर्षीय वासुदेव गुप्ता को मिली राहत, खुले शासकीय योजनाओं के द्वार
बलरामपुर, 12 सितंबर 2026/
पहचान का एक छोटा-सा दस्तावेज जीवन में कितना बड़ा अंतर ला सकता है, इसका जीवंत उदाहरण बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के ग्राम पंचायत झलपी (पोस्ट-महाराजगंज) के 75 वर्षीय श्री वासुदेव गुप्ता का प्रकरण है। आधार कार्ड न बन पाने के कारण श्री गुप्ता को शासकीय योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।
बीते चार वर्षों में उन्होंने क्षेत्र के लगभग प्रत्येक आधार केंद्र का द्वार खटखटाया और कई बार नामांकन भी कराया, किंतु पावती से स्थिति की जाँच करने पर हर बार तकनीकी कारण बताकर आवेदन निरस्त हो जाता। आधार क्रमांक जारी कराने की आशा में उन्होंने अंबिकापुर स्थित आधार सेवा केंद्र तक की दौड़ लगाई, परंतु परिणाम वही रहा। लंबी भागदौड़ के बाद उनकी उम्मीद धीरे-धीरे क्षीण होने लगी थी।
स्थिति ने नया मोड़ तब लिया जब कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी की संवेदनशील पहल पर जिला प्रशासन ने आमजन की ऐसी लंबित शिकायतों को प्राथमिकता में लेकर त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। उनके मार्गदर्शन में जिला आधार टीम एवं चिप्स कार्यालय के ई-डीएम, डीसी तथा एमटीओ ने तकनीकी अड़चनों की परत-दर-परत जाँच कर आपसी समन्वय से समाधान का मार्ग निकाला और श्री गुप्ता का आधार कार्ड सफलतापूर्वक बनाकर उन्हें सौंपा गया। वर्षों की प्रतीक्षा समाप्त होते ही उनके लिए शासन की पात्रतापूर्ण योजनाओं के द्वार खुल गए और दीर्घकाल से चली आ रही आर्थिक व मानसिक कठिनाइयों से उन्हें बड़ी राहत मिली। आधार कार्ड हाथ में आते ही उनके चेहरे पर लौटी संतोष की मुस्कान प्रशासनिक प्रयासों की सार्थकता बयां करती रही। श्री गुप्ता ने जिला प्रशासन के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया।
आधार अद्यतन हो जाने से अब श्री वासुदेव गुप्ता शासन की समस्त जनकल्याणकारी योजनाओं का हिस्सा बन सकेंगे। एक कृषक के रूप में वे एग्री स्टैक में पंजीयन कराकर सुलभतापूर्वक धान का विक्रय कर सकेंगे तथा कृषक हितैषी अन्य योजनाओं से भी सहजता से जुड़ सकेंगे। इसके साथ ही पेंशन, राशन कार्ड की ई-केवायसी, बैंकिंग सुविधाओं एवं ऋण संबंधी प्रक्रियाओं का मार्ग भी प्रशस्त हुआ है, जिससे वृद्धावस्था में उन्हें आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का संबल प्राप्त होगा।
उल्लेखनीय है कि जिला प्रशासन का प्रयास केवल एक प्रकरण के निपटारे तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसी व्यवस्था विकसित करने की दिशा में है जहाँ पहचान संबंधी समस्याएँ किसी पात्र हितग्राही के हक में बाधा न बनें। इसी उद्देश्य से आधार नामांकन एवं अद्यतन की सुविधाओं को सुलभ बनाने, तकनीकी कारणों से निरस्त होने वाले प्रकरणों की पृथक पहचान कर उन्हें विशेष प्रयासों से पूर्ण कराने तथा विभागों के बीच सतत समन्वय स्थापित करने पर बल दिया जा रहा है, जिससे वृद्धजन और दूरस्थ अंचलों के नागरिकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। जिला प्रशासन का यह संवेदनशील दृष्टिकोण अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं की पहुँच सुनिश्चित करने की दिशा में एक सार्थक कदम है।