पद्म विभूषण पंडवानी गायिका तीजन बाई का निधन: छत्तीसगढ़ की लोककला को विश्व पहचान दिलाने वाली स्वर-साधिका का अंत…

महाभारत की कथाओं को जीवंत करने वाली पंडवानी गायिका का दुनियां से विदा लेना, कला जगत में शोक की लहर

छत्तीसगढ़ की विश्वप्रसिद्ध पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण सम्मानित डॉ. तीजन बाई का निधन हो गया। वे 70 वर्ष की थीं। देर रात उन्होंने रायपुर स्थित AIIMS अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन से भारतीय लोककला, विशेषकर पंडवानी परंपरा, को गहरी क्षति हुई है।लोककला की वह आवाज़ जिसने दुनियां में छत्तीसगढ़ को पहचान दिलाई

तीजन बाई ने अपनी दमदार प्रस्तुति और अनोखे गायन-शैली के जरिए पंडवानी को सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में लोकप्रिय बना दिया। वे महाभारत की कथाओं को जीवंत अभिनय और प्रभावशाली आवाज़ के साथ प्रस्तुत करने के लिए जानी जाती थीं।पंडवानी के माध्यम से देश-विदेश में पहचान बनाई

लोककला में उन्हें “वैश्विक प्रतिनिधि” माना जाता था

उनका अंदाज़ लोगों को महाभारत की कथाओं से सीधे जोड़ देता था

सम्मान और उपलब्धियांअपने लंबे और ऐतिहासिक कला सफर में उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मानों से नवाजा गया-

पद्मश्री

पद्म भूषण

पद्म विभूषण

इसके अलावा उन्हें कई अन्य राष्ट्रीय और सांस्कृतिक सम्मान भी प्राप्त हुए, जिससे उनकी कला यात्रा और योगदान को मान्यता मिली। संघर्ष से शुरू हुआ सफर

उनका जन्म 24 अप्रैल 1956 को छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के ग्राम गनियारी में हुआ था। वे एक साधारण परिवार और कृषक समुदाय से थीं। बचपन से ही उन्हें अपने नाना से महाभारत की कहानियाँ सुनने का शौक था, जिसने आगे चलकर उनके जीवन की दिशा बदल दी।

13 वर्ष की उम्र में उन्होंने पहली बार मंच पर प्रस्तुति दी

उसी समय से उनका कला सफर शुरू हुआ, जिसने उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाई

अंतिम समय और स्वास्थ्य स्थिति

जानकारी के अनुसार, उन्हें वर्ष 2027 में गंभीर हालत में AIIMS रायपुर में भर्ती कराया गया था। परिजनों के मुताबिक देर रात करीब 3:15 बजे डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित किया।

हाल ही में उनकी तबीयत लगातार खराब चल रही थी

1 नवंबर को प्रधानमंत्री ने फोन कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली थी

अंतिम समय में कई वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि उनके गांव पहुंचे और श्रद्धांजलि दी

🇮🇳 शोक की लहर

उनके निधन पर पूरे देश में शोक व्यक्त किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने उनके योगदान को याद करते हुए श्रद्धांजलि दी

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने राज्य का नाम विश्व स्तर पर रोशन किया

लोककला जगत में उन्हें “पंडवानी की अमर आवाज़” कहा जाता है

विरासत जो हमेशा जीवित रहेगी

तीजन बाई केवल एक कलाकार नहीं थीं, बल्कि भारतीय लोकपरंपरा की एक जीवंत धरोहर थीं। उनकी आवाज़, उनका अभिनय और उनका समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।

भले ही उनकी प्रस्तुति मंच पर अब न दिखे, लेकिन पंडवानी की हर धड़कन में उनका स्वर हमेशा जीवित रहेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *