दुर्ग में निजी स्कूलों की मनमानी पर पेरेंट्स का हल्ला बोल: हर साल बदल रहे किताब-ड्रेस, कलेक्टर से सख्त कार्रवाई की मांग
दुर्ग। जिले में निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ अब पालकों का गुस्सा खुलकर सामने आने लगा है। बुधवार को पेरेंट्स यूनियन के पदाधिकारियों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर स्कूल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।
पेरेंट्स यूनियन के अमित जैन और अय्यूब खान समेत अन्य पदाधिकारियों ने बताया कि जिले के कई निजी स्कूल हर साल नर्सरी से लेकर कक्षा आठवीं तक के बच्चों का सिलेबस बदल देते हैं। इसके कारण पिछले साल खरीदी गई किताबें पूरी तरह बेकार हो जाती हैं और पालकों को हर साल नई किताबें खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
उन्होंने बताया कि बच्चों की किताबों पर हर साल करीब 4 से 5 हजार रुपए तक का खर्च आता है, जिससे मध्यम वर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ रहा है।
पेरेंट्स ने यह भी आरोप लगाया कि निजी स्कूलों में किताबों के साथ-साथ बच्चों का ड्रेस कोड भी हर साल बदल दिया जाता है, जिससे पुरानी यूनिफॉर्म किसी काम की नहीं रहती और हर साल नई ड्रेस खरीदनी पड़ती है।
अभिभावकों का कहना है कि यह पूरा खेल कुछ बुक डिपो और ड्रेस विक्रेताओं के साथ मिलकर चलाया जा रहा है। स्कूल प्रबंधन पर कमीशनखोरी का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग की ओर से इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।
पेरेंट्स ने कलेक्टर से मांग की है कि निजी स्कूलों में कक्षा आठवीं तक एक ही प्रकाशक की किताबें कम से कम 5 साल तक अनिवार्य की जाएं और यूनिफॉर्म भी 5 साल तक नहीं बदली जाए। यदि सिलेबस में बदलाव जरूरी हो तो इसके लिए जिला शिक्षा अधिकारी से पूर्व अनुमति ली जाए और इसकी जानकारी सत्र शुरू होने से कम से कम 3 महीने पहले स्कूल के नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर जारी की जाए।
साथ ही, ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि किताब और ड्रेस के नाम पर कमीशन लेने वाले स्कूल प्रबंधन, बुक डिपो और दुकानदारों पर सख्त कार्रवाई की जाए।