महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में कक्षा चौथी की परीक्षा के एक सवाल ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। अंग्रेजी विषय के प्रश्नपत्र में कुत्ते के नाम से जुड़े सवाल के विकल्प में ‘राम’ शब्द शामिल किए जाने को लेकर धार्मिक और सामाजिक संगठनों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। मामले की विभागीय जांच में जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) महासमुंद को दोषी पाया गया है।
दरअसल, सरकारी स्कूलों में कक्षा चौथी के विद्यार्थियों के लिए मिड-टर्म एग्जाम 6 जनवरी 2025 को आयोजित किया गया था। इस परीक्षा के क्वेश्चन पेपर तैयार कराने की जिम्मेदारी समग्र शिक्षा अभियान की APC (असिस्टेंट प्रोजेक्ट को-ऑर्डिनेटर) सीमा बोस को दी गई थी।
सीमा बोस ने प्रश्नपत्र तैयार करने के लिए एक एक्सपर्ट कमेटी गठित की थी, जिसमें पांच शिक्षक शामिल थे। इसी कमेटी द्वारा तैयार प्रश्नपत्र में अंग्रेजी का वह विवादित सवाल शामिल हो गया, जिसमें पूछा गया था-
“What is Mona’s dog’s name?”
इसके विकल्पों में ‘शेरू’ के साथ ‘राम’ भी शामिल कर दिया गया।
6 जनवरी को परीक्षा होने के बाद यह प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसके बाद मामला तूल पकड़ गया और धार्मिक संगठनों ने इसे भगवान श्रीराम के नाम का अपमान बताते हुए कड़ा विरोध शुरू कर दिया।
विवाद बढ़ने पर NSUI रायपुर ने बुधवार (7 जनवरी) को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। इस दौरान जिला शिक्षा अधिकारी हिमांशु भारती ने इसे विभागीय गलती मानते हुए स्वीकार किया।
महासमुंद DEO हिमांशु भारती ने कहा- किसी की भावना को आहत करने का कोई उद्देश्य नहीं था। शिक्षा विभाग से यह गलती हुई है। उन्होंने बताया कि- पूरे मामले की जांच के लिए एक जांच समिति गठित की जा रही है, समिति 7 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, रिपोर्ट के आधार पर जिसकी भी गलती सामने आएगी, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
APC सीमा बोस ने बयान जारी कर कहा कि-उन्होंने जो पीडीएफ भेजी थी, उसमें ऐसा कोई प्रश्न नहीं था, अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि विवादित प्रश्न किस स्तर पर जोड़ा गया, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए
मामले को लेकर हिंदू संगठनों ने महासमुंद और रायपुर में विरोध प्रदर्शन किया। संगठनों का कहना है कि- भगवान श्रीराम का नाम किसी जानवर से जोड़ना आस्था का अपमान है। दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। विरोध की गूंज छत्तीसगढ़ से लेकर मध्यप्रदेश तक सुनाई दी।
शिक्षा विभाग के अनुसार- जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद DEO सहित संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी, भविष्य में प्रश्नपत्र निर्माण में मल्टी-लेवल जांच व्यवस्था लागू की जाएगी संवेदनशील शब्दों और विषयों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी होंगे