रायपुर। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी व्यवस्था की बदहाली एक बार फिर सियासी घमासान की वजह बन गई है। राज्य के विभिन्न जिलों के धान खरीद केंद्रों पर करीब 26 करोड़ रुपये मूल्य का धान चूहों, दीमक, बारिश और खराब भंडारण व्यवस्था के कारण खराब हो गया। इस मुद्दे को लेकर दीपक बैज के नेतृत्व में कांग्रेस ने BJP सरकार पर सीधा हमला बोला है, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने पलटवार करते हुए कांग्रेस को ही कठघरे में खड़ा किया है।
जिलावार नुकसान का आंकड़ा: कहां कितना धान बर्बाद हुआ:
सरकारी और विपक्षी दावों के मुताबिक, सबसे ज्यादा नुकसान इन जिलों में सामने आया है-
कवर्धा – लगभग 7 करोड़ रुपये का धान खराब
जशपुर – करीब 7 करोड़ रुपये का नुकसान
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही – लगभग 6 करोड़ रुपये
महासमुंद – करीब 5.5 करोड़ रुपये
कुल मिलाकर राज्य को 25-26 करोड़ रुपये से अधिक का सीधा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है।
बस्तर में मरा चूहा, और सियासी व्यंग्य:
मामला तब और गरमा गया जब बस्तर के एक धान खरीद केंद्र का दौरा करते हुए PCC चीफ दीपक बैज ने वहां मरा हुआ चूहा दिखाकर BJP सरकार पर तंज कसा।
बैज ने कहा-
इतना धान बर्बाद हो गया कि बेचारा चूहा भी पचा नहीं पाया। लगता है इसी चूहे ने कवर्धा और जशपुर का धान खा लिया।
बैज का आरोप है कि बस्तर संभाग में ही 1.46 लाख क्विंटल धान बर्बाद हो चुका है, जिसकी जिम्मेदारी सीधे तौर पर राज्य सरकार की है।
‘BJP के चूहे 100 करोड़ का धान खा सकते हैं:
कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन किए। दीपक बैज ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा-
BJP सरकार के चूहे इतने ताकतवर हैं कि 100 करोड़ रुपये का धान भी खा सकते हैं।
कांग्रेस का आरोप है कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि धान घोटाला है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
विकास उपाध्याय का अनोखा विरोध:
कांग्रेस के पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने विरोध के दौरान खाद्य मंत्री को चूहा पकड़ने का जाल भेंट कर दिया।
उनका कहना था- जब सरकार धान नहीं बचा पा रही, तो कम से कम चूहों को पकड़ने का इंतजाम तो करे।
BJP का पलटवार: ‘देश को किसने कुतरा, जनता जानती है’
कांग्रेस के आरोपों पर BJP ने तीखी प्रतिक्रिया दी। पार्टी नेताओं ने कहा-
देश और प्रदेश को किसने वर्षों तक कुतरा है, यह जनता अच्छी तरह जानती है। कांग्रेस को नैतिकता की बात करने का कोई अधिकार नहीं।
BJP का दावा है कि धान खराब होने के पीछे प्राकृतिक कारण और पूर्ववर्ती व्यवस्थागत खामियां भी जिम्मेदार हैं।
धान क्यों खराब हुआ? सामने आए ये कारण:
जानकारी के अनुसार धान खराब होने के पीछे कई वजहें सामने आई हैं- धान का लंबे समय तक खुले में पड़ा रहना।
समय पर मिलिंग और उठाव न होना।
बारिश और नमी के कारण धान का काला पड़ जाना।
स्टोरेज गोदामों में चूहे और दीमक का प्रकोप।
किसान सबसे ज्यादा परेशान:
धान खराब होने का सीधा असर किसानों पर पड़ा है। किसानों का कहना है कि उन्होंने समय पर धान बेचा, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही की कीमत उन्हें चुकानी पड़ रही है। कई किसान आशंकित हैं कि नुकसान का बोझ अंततः उन्हीं पर न डाल दिया जाए।
राजनीति बनाम जिम्मेदारी:
एक तरफ कांग्रेस इसे सरकारी लापरवाही और घोटाला बता रही है, तो दूसरी ओर BJP इसे राजनीतिक स्टंट करार दे रही है। लेकिन इस सियासी टकराव के बीच सवाल वही है- क्या राज्य की धान खरीदी और भंडारण व्यवस्था में सुधार होगा, या हर साल अनाज यूं ही चूहों और बारिश की भेंट चढ़ता रहेगा?