ई-मेल रिकॉर्ड और मामले से जुड़े दस्तावेजों की जांच के बाद आयोग ने बीमा कंपनी को क्लेम की रकम चुकाने का निर्देश दिया
मुंबई। बीमा पॉलिसी लेने के बाद क्लेम खारिज होने से परेशान उपभोक्ताओं के लिए मुंबई से एक महत्वपूर्ण मामला सामने आया है। मुंबई के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक बीमा विवाद में कंपनी को ₹8.06 करोड़ का भुगतान करने का आदेश दिया है। आयोग ने मामले की सुनवाई के दौरान उपलब्ध रिकॉर्ड और ई-मेल के माध्यम से हुई बातचीत को भी महत्वपूर्ण साक्ष्य माना।
मामला बीमा क्लेम को खारिज किए जाने से जुड़ा था। शिकायतकर्ता की ओर से बीमा कंपनी के समक्ष क्लेम का भुगतान किए जाने की मांग की गई थी, लेकिन कंपनी ने इसे स्वीकार नहीं किया। इसके बाद विवाद उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा।
ई-मेल रिकॉर्ड बना अहम सबूत
सुनवाई के दौरान आयोग ने मामले से जुड़े ई-मेल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच की। इन रिकॉर्ड के आधार पर आयोग ने बीमा कंपनी के क्लेम से जुड़े रुख का परीक्षण किया। आयोग ने उपलब्ध साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया और बीमा कंपनी को ₹8.06 करोड़ की राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया।
बीमा क्लेम पर उपभोक्ता आयोगों का सख्त रुख
बीमा क्लेम को लेकर हाल के कई मामलों में उपभोक्ता आयोगों ने कंपनियों को यह याद दिलाया है कि वैध क्लेम को केवल तकनीकी या अपर्याप्त आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता। इससे पहले भी अलग-अलग मामलों में उपभोक्ता आयोगों ने बीमा कंपनियों को क्लेम की राशि, ब्याज और अन्य राहत देने के निर्देश दिए हैं।
इस मामले का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इसमें करोड़ों रुपये के बीमा क्लेम से जुड़ा विवाद था और आयोग ने रिकॉर्ड में मौजूद इलेक्ट्रॉनिक संचार को भी निर्णय के दौरान महत्व दिया।
पॉलिसीधारकों के लिए क्या है संदेश?
बीमा पॉलिसी लेते समय उसके नियम और शर्तों को ध्यान से पढ़ना, प्रीमियम और पॉलिसी से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रखना तथा क्लेम से संबंधित कंपनी के साथ हुई लिखित बातचीत को संभालकर रखना बेहद महत्वपूर्ण है। विवाद की स्थिति में यही दस्तावेज उपभोक्ता के दावे को साबित करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।