अंबिकापुर। आस्था के नाम पर हुई बड़ी लापरवाही ने सैकड़ों लोगों की चिंता बढ़ा दी है। जी हां अंबिकापुर क्षेत्र में आयोजित ‘निकाली पूजा’ के दौरान जिस बकरे की बलि दी गई, उसे पहले ही एक पागल कुत्ते ने काट लिया था। इसके बावजूद बकरे का मांस प्रसाद के रूप में करीब 400 पुरुषों ने खा लिया। इस घटना के बाद अब पूरे इलाके में रैबीज संक्रमण का डर फैल गया है।
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि इस पूजा के दौरान मांस सिर्फ पुरुषों ने ही खाया, महिलाओं और बच्चों ने मांस का सेवन नहीं किया। इसके बावजूद बड़ी संख्या में पुरुषों के मांस खाने से स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है।
पूजा संपन्न होने के बाद जब ग्रामीणों को यह जानकारी मिली कि बलि दिए गए बकरे को पहले पागल कुत्ते ने काटा था, तो गांव में अफरा-तफरी मच गई। लोग आशंका जता रहे हैं कि यदि कुत्ता रैबीज से संक्रमित था, तो इसका असर मांस खाने वालों पर पड़ सकता है।
घबराए ग्रामीणों का प्रतिनिधिमंडल स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों के पास पहुंचा। उन्होंने मांग की कि मांस खाने वाले सभी पुरुषों की स्वास्थ्य जांच कराई जाएं, ज़रूरत पड़ने पर रैबीज से बचाव के टीके लगाए जाएं, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी हों
मामले की जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है।अधिकारियों का कहना है कि एहतियात के तौर पर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं और स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि,क्या आस्था के नाम पर स्वास्थ्य से समझौता किया जा सकता है? क्या संक्रमित जानवरों के मामलों में जागरूकता और सतर्कता की अनदेखी भारी नहीं पड़ सकती?