रायपुर। 2 जनवरी 2026: छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाले मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को बिलासपुर हाईकोर्ट ने जमानत दे दी है। यह फैसला तब आया है जब वह पिछले करीब 5 महीने से जेल में बंद थे और उनकी गिरफ्तारी को उन्होंने न्यायालय में चुनौती दी थी।
बिलासपुर हाईकोर्ट ने चैतन्य बघेल की जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे वे लगभग 168 दिनों के बाद जेल से बाहर आ सकते हैं। यह राहत शराब घोटाले संबंधी ED और EOW द्वारा दाखिल आरोपों के खिलाफ गिरफ्तारी को सुप्रीम कोर्ट तथा हाईकोर्ट में चुनौती देने के दबाव के बीच मिली है।
यह मामला छत्तीसगढ़ में कथित शराब व्यापार में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और अवैध लेन-देन से जुड़ा है। एजेंसी का आरोप है कि 2019 से 2022 के बीच बनाया गया एक “पैरेलल एक्साइज सिस्टम” सरकार को ₹2,000 करोड़ से अधिक का नुकसान पहुंचाने वाला था, जिसमें चैतन्य बघेल के नाम भी आपराधिक मनी लॉन्डरिंग और धनशोधन में भूमिका होने के आरोप शामिल हैं। इडी का दावा है कि चैतन्य ने शेल कंपनियों और रियल एस्टेट के माध्यम से अवैध रूप से प्राप्त धन को छुपाने का प्रयास किया।
गौरतलब है कि 18 जुलाई 2025 में चैतन्य बघेल को इडी की गिरफ्तारी के बाद विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया और उन्हें पहले 5 दिन की इडी रिमांड पर भेजा गया था। बाद में उन पर जमानत याचिका दायर की गई, जिसे पहले हाईकोर्ट ने सुरक्षित रखा और सुप्रीम कोर्ट में भी उनकी गिरफ्तारी तथा संबंधित प्रावधानों पर सुनवाई हुई। अब हाईकोर्ट ने जमानत मंजूर कर ली, जिससे वह प्रारंभिक हिरासत से बाहर आ पाएंगे।
इस मामले ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में जबरदस्त हलचल मचाई है। कुछ विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि कार्रवाई में राजनीतिक उद्देश्य है, जबकि जांच एजेंसियां इस पर कभी भी कानून का उल्लंघन नहीं होने का दावा करती हैं। सुप्रीम कोर्ट में भी गिरफ्तारी के खिलाफ याचिका पर सुनवाई जारी है, और कोर्ट ने इस पर आगे की सुनवाई जनवरी में होने का निर्णय लिया है।
कुल मिलाकर जमानत से चैतन्य बघेल को अस्थायी राहत मिली है, लेकिन मामला पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। इडी का अंतिम आरोप-पत्र और चार्जशीट प्रक्रिया अब भी अदालत में लंबित है, और आगे की कानूनी लड़ाई जारी रहने की संभावना है।