चुनाव आयोग ने कहा- SIR से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए, आंतरिक आपत्तियां संवैधानिक संस्था के सामान्य चेक एंड बैलेंस का हिस्सा
नई दिल्ली, 25 सितंबर 2026। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों की खबरों के बीच आयोग की ओर से महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण सामने आया है। सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक बिहार, असम समेत 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े SIR आदेशों को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी थी।
बिहार से लेकर 19 राज्यों तक के आदेशों पर मंजूरी का दावा
ABP की रिपोर्ट के मुताबिक सूत्रों ने बताया कि मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों ने मिलकर बिहार के लिए जारी SIR आदेश, असम के लिए जारी आदेश, 12 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के लिए जारी आदेश तथा 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से संबंधित SIR आदेशों को मंजूरी दी थी।
यह स्पष्टीकरण ऐसे समय सामने आया है जब SIR की प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित असहमति की खबरों ने राजनीतिक और सार्वजनिक बहस को तेज कर दिया है।
Form-6 के साथ देना होगा घोषणा पत्र
मंजूर किए गए SIR आदेशों में नए मतदाताओं के पंजीकरण से जुड़े Form-6 के साथ एक घोषणा पत्र यानी Declaration Form शामिल किए जाने की बात भी सामने आई है। आयोग के मुताबिक इसका उद्देश्य पंजीकरण की प्रक्रिया को सरल बनाना और कागजी कार्रवाई को कम करना है।
चुनाव आयोग की ओर से यह भी कहा गया है कि यह व्यवस्था जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21(3) के तहत की गई है। आयोग ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के 27 मई 2026 के फैसले का भी हवाला दिया है, जिसमें घोषणा पत्र की व्यवस्था से संबंधित आयोग के अधिकार को बरकरार रखा गया था।
दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों की खबरों के बाद आया स्पष्टीकरण
दरअसल, हाल में ऐसी रिपोर्ट सामने आई थी कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों के दौरान आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर कई बार आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में मतदाता नाम जोड़ने-हटाने, Form-6 में बदलाव और मतदाता डेटा के प्रबंधन जैसे मुद्दों का उल्लेख किया गया था।
इसके बाद चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि उसके सभी निर्णय, जिनमें SIR भी शामिल है, मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग ने कहा कि बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था में लिखित टिप्पणियां, सुझाव और आंतरिक जांच-परख सामान्य संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
आयोग ने कहा- कानून और नियमों के अनुसार हुई कार्रवाई
चुनाव आयोग के आधिकारिक स्पष्टीकरण के अनुसार आयोग के सभी कार्य संविधान के अनुच्छेद 324, संबंधित कानूनों, नियमों और आयोग के निर्देशों के अनुरूप किए गए हैं। आयोग ने यह भी कहा कि आंतरिक चेक एंड बैलेंस को निर्णयों में असहमति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
इस तरह SIR को लेकर सामने आई आपत्तियों और आयोग के आधिकारिक स्पष्टीकरण के बीच अब मुख्य सवाल प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े प्रावधानों पर केंद्रित है। चुनाव आयोग का कहना है कि संबंधित आदेशों को पूर्ण आयोग की मंजूरी प्राप्त थी।