हिरासत में प्रताड़ना के आरोपों पर शीर्ष अदालत ने यूपी सरकार से मांगा जवाब, 18 मई को कोर्ट में पेश होंगे आरोपी
नई दिल्ली। नोएडा में औद्योगिक मजदूरों के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि गिरफ्तार किए गए दो आरोपियों आदित्य आनंद और रूपेश रॉय को 18 मई को अदालत में पेश किया जाए। मामला हिरासत में कथित प्रताड़ना के आरोपों से जुड़ा है।
जस्टिस बीवी नाग रत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने यह आदेश आदित्य आनंद के भाई केशव आनंद की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि गिरफ्तारी के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने आदित्य आनंद के साथ हिरासत में मारपीट और प्रताड़ना की।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता Colin Gonsalves ने अदालत को बताया कि आदित्य आनंद एक इंजीनियर हैं और बच्चों के लिए लाइब्रेरी भी चलाते हैं। उन्होंने कहा कि मजदूर आंदोलन के दौरान दिए गए उनके भाषण केवल श्रमिक अधिकारों से जुड़े थे और इसके वीडियो रिकॉर्ड भी मौजूद हैं। उन्होंने मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की।
वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश वकील ने हिरासत में प्रताड़ना के सभी आरोपों को खारिज किया। सरकार ने अदालत से कहा कि गिरफ्तारी के दौरान सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया और आरोपियों को गिरफ्तारी के आधार की जानकारी भी दी गई थी।
दरअसल, अप्रैल में नोएडा के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों ने वेतन वृद्धि और श्रमिक अधिकारों को लेकर प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के दौरान हिंसा, आगजनी और पथराव की घटनाएं सामने आई थीं, जिसके बाद पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार किया था। मामले में पत्रकार Satyam Verma और अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं पर भी कार्रवाई की गई है।