बांग्लादेशी PM ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मांगा सहयोग, कहा- म्यांमार में सुरक्षित माहौल बनाना जरूरी; 12 लाख से अधिक रोहिंग्या अब भी बांग्लादेश में
न्यूयॉर्क। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में रोहिंग्या संकट को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि इस समस्या का स्थायी समाधान रोहिंग्या शरणार्थियों की सुरक्षित, स्वैच्छिक, सम्मानजनक और टिकाऊ वापसी म्यांमार में ही है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस दिशा में ठोस और प्रभावी कदम उठाने की अपील की।
तारिक रहमान ने कहा कि बांग्लादेश पिछले नौ वर्षों से म्यांमार से विस्थापित 12 लाख से अधिक रोहिंग्याओं को शरण दे रहा है। लंबे समय तक उनके बांग्लादेश में रहने से देश के संसाधनों, पर्यावरण, सुरक्षा व्यवस्था और स्थानीय समुदायों पर दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि रोहिंग्या संकट की जड़ म्यांमार में है और समाधान भी वहीं तलाशना होगा।
वापसी के लिए सुरक्षित माहौल जरूरी
प्रधानमंत्री ने कहा कि केवल रोहिंग्याओं को वापस भेजना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि म्यांमार में ऐसा वातावरण तैयार करना होगा जहां वे सुरक्षा और सम्मान के साथ अपने घर लौट सकें। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से म्यांमार में स्थिरता लाने और वापसी के अनुकूल परिस्थितियां बनाने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने की अपील की।
इससे पहले 23 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय कार्यक्रम में तारिक रहमान ने रोहिंग्या संकट के समाधान के लिए पांच प्राथमिक कदम भी प्रस्तावित किए थे। इनमें सुरक्षित और टिकाऊ वापसी का स्पष्ट रोडमैप, हिंसा पर रोक, मानवीय सहायता जारी रखना, न्याय एवं जवाबदेही सुनिश्चित करना तथा मानव तस्करी और मादक पदार्थों समेत सीमा-पार अपराधों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना शामिल है।
‘मानवीय सहायता के साथ राजनीतिक समाधान भी जरूरी’
तारिक रहमान ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की मानवीय सहायता महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे राजनीतिक समाधान का विकल्प नहीं बनाया जा सकता। बांग्लादेश का कहना है कि वह लंबे समय तक रोहिंग्या आबादी की मेजबानी का भार अकेले नहीं उठा सकता।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों से अपील की कि रोहिंग्याओं की वापसी तक जीवनरक्षक मानवीय सहायता जारी रखी जाए। साथ ही उन्होंने म्यांमार में रोहिंग्याओं के अधिकारों और सुरक्षा की गारंटी को वापसी की प्रक्रिया का अहम हिस्सा बताया।
न्याय और जवाबदेही पर भी जोर
रोहिंग्या संकट के समाधान के लिए तारिक रहमान ने न्याय और जवाबदेही को भी जरूरी बताया। उनके पांच सूत्रीय प्रस्ताव में अंतरराष्ट्रीय न्यायिक एवं जांच तंत्र को निरंतर समर्थन देने और गंभीर अपराधों के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की बात कही गई है।
बांग्लादेशी प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि लंबे समय तक विस्थापन से मानव तस्करी, मादक पदार्थों की तस्करी और अन्य सीमा-पार अपराधों जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसलिए रोहिंग्या संकट केवल मानवीय मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा से जुड़ा विषय भी बन गया है।
UNGA में शांति और कूटनीति का संदेश
तारिक रहमान ने अपने संबोधन में दुनिया में बढ़ते संघर्षों और आर्थिक दबावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने विवादों के समाधान के लिए संवाद, कूटनीति और आपसी सहयोग को प्राथमिकता देने की बात कही। उनका कहना था कि युद्ध और संघर्षों के कारण ऊर्जा संकट, महंगाई और वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है।
रोहिंग्या मुद्दे पर उनका मुख्य संदेश यही रहा कि विस्थापन को अनिश्चितकाल तक जारी रखने के बजाय ऐसा समाधान तलाशना होगा, जिससे शरणार्थी सुरक्षित और सम्मान के साथ अपने मूल स्थान म्यांमार लौट सकें।