UNSC की स्थायी सीट के लिए भारत के पक्ष में पुर्तगाल, पाकिस्तान समेत ‘कॉफी क्लब’ ने बढ़ती स्थायी सदस्यता पर जताया विरोध…

संयुक्त राष्ट्र महासभा में सुरक्षा परिषद सुधार को लेकर फिर आमने-सामने आए दो अलग प्रस्ताव, पुर्तगाल ने भारत के साथ अफ्रीका और ब्राजील की स्थायी सदस्यता की वकालत की

न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी को एक और यूरोपीय देश का समर्थन मिला है। पुर्तगाल के प्रधानमंत्री लुइस मोंटेनेग्रो ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए सुरक्षा परिषद में भारत के साथ अफ्रीका और ब्राजील को स्थायी प्रतिनिधित्व दिए जाने की पैरवी की। उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद को मौजूदा वैश्विक वास्तविकताओं के अनुरूप अधिक प्रतिनिधित्व वाला बनाया जाना चाहिए।

पुर्तगाल का यह रुख ऐसे समय सामने आया है, जब संयुक्त राष्ट्र में सुरक्षा परिषद के विस्तार और उसके स्वरूप को लेकर सदस्य देशों के बीच लंबे समय से चर्चा चल रही है। भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की मांग करता रहा है और इस मुद्दे पर उसे विभिन्न देशों और समूहों का समर्थन मिलता रहा है।

पुर्तगाल ने भारत के साथ अफ्रीका और ब्राजील का भी नाम लिया

पुर्तगाली प्रधानमंत्री मोंटेनेग्रो ने महासभा के संबोधन में सुरक्षा परिषद को अधिक प्रतिनिधित्व वाला बनाने पर जोर दिया। उनके अनुसार बदलती वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए परिषद में अफ्रीका, भारत और ब्राजील जैसे देशों को स्थायी स्थान मिलना चाहिए।

यह समर्थन ऐसे समय आया है जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की प्रक्रिया पर सदस्य देशों के बीच बातचीत जारी है। हाल ही में भारत की स्थायी सदस्यता के समर्थन में यूरोप के वाइसेग्राड समूह के चार देशों ने भी अपना समर्थन दोहराया था।

पाकिस्तान वाले ‘यूनाइटिंग फॉर कंसेंसस’ समूह का अलग रुख

दूसरी ओर पाकिस्तान समेत 12 देशों के यूनाइटिंग फॉर कंसेंसस (UfC) समूह ने सुरक्षा परिषद में नई स्थायी सीटें बनाने का विरोध दोहराया है। इस समूह को आमतौर पर ‘कॉफी क्लब’ के नाम से जाना जाता है।

24 सितंबर को जारी संयुक्त बयान में समूह ने कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए निर्वाचित सदस्यों की संख्या बढ़ाना अधिक प्रतिनिधित्व वाला रास्ता होगा। समूह ने लंबे कार्यकाल वाली रोटेशनल सीटों का विकल्प भी सामने रखा है।

इस समूह में पाकिस्तान के अलावा इटली, तुर्किये, मैक्सिको, कनाडा, अर्जेंटीना, कोलंबिया, स्पेन, कोस्टा रिका, माल्टा, दक्षिण कोरिया और सैन मैरिनो शामिल हैं।

वीटो पावर को लेकर भी कॉफी क्लब का प्रस्ताव

यूनाइटिंग फॉर कंसेंसस समूह ने सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों की वीटो व्यवस्था पर भी अपनी स्थिति स्पष्ट की है। समूह ने वीटो को समाप्त करने की वकालत की है और तत्काल अवधि में कुछ विशेष परिस्थितियों में इसके इस्तेमाल को सीमित करने की बात कही है।

समूह का कहना है कि सुरक्षा परिषद में निर्वाचित सदस्यता का विस्तार संप्रभु समानता के सिद्धांत को बनाए रखते हुए परिषद को अधिक प्रतिनिधित्व वाला बना सकता है।

सुरक्षा परिषद में सुधार पर जारी है वैश्विक बहस

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में फिलहाल पांच स्थायी सदस्य हैं—अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन। इनके पास वीटो पावर है। इसके अलावा 10 अस्थायी सदस्य होते हैं, जिन्हें महासभा द्वारा निर्धारित अवधि के लिए चुना जाता है।

सुरक्षा परिषद की मौजूदा संरचना को आज की वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप बनाने की मांग लंबे समय से उठती रही है। भारत समेत कई देश परिषद में व्यापक प्रतिनिधित्व की आवश्यकता पर जोर देते हैं। दूसरी ओर यूनाइटिंग फॉर कंसेंसस समूह नई स्थायी सीटों के बजाय निर्वाचित सदस्यों की संख्या बढ़ाने के मॉडल का समर्थन करता है।

ऐसे में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान सुरक्षा परिषद सुधार का मुद्दा एक बार फिर प्रमुख कूटनीतिक बहस के केंद्र में है। भारत के लिए पुर्तगाल का समर्थन उसकी स्थायी सदस्यता की मांग के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम के रूप में सामने आया है।

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