रायपुर। स्कूल शिक्षा विभाग के ताज़ा आदेश ने शिक्षकों की जिम्मेदारियों की सूची को और लंबा कर दिया है। नए निर्देश में कहा गया है कि विद्यालय परिसर में बच्चों को जहरीले सांप-बिच्छू और अन्य हानिकारक जीवों से सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी अब शिक्षकों पर भी रहेगी। यह आदेश सामने आते ही शिक्षा जगत में चर्चा तेज हो गई है।
यह आदेश लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के मौजूदा निर्देश क्रमांक 05/2025 के अनुपालन में जारी किया गया है।
कई शिक्षक संगठनों ने इसे अव्यवहारिक और जोखिमपूर्ण बताते हुए चिंता जताई है। उनका कहना है कि ग्रामीण और जंगल क्षेत्रों में स्थित स्कूलों में सांप-बिच्छू का निकलना आम बात है, लेकिन ना तो शिक्षकों को कोई सुरक्षा उपकरण उपलब्ध है, ना ही वो प्रशिक्षीत हैं। और ऐसे में उन्हें इस तरह की जिम्मेदारी देना वास्तविक खतरे पैदा कर सकता है। आदेश सामने आते ही कई शिक्षकों ने नाराज़गी जताते हुए कहा-हम पढ़ाने आए हैं जंगल सफारी करने नहीं, पहले कुत्ते भगाओ, अब सांप-बिच्छू भी भगाओ! अगर किसी शिक्षक को डस लिया तो जिम्मेदार कौन होगा। स्कूलों में सुरक्षा इंतज़ाम की जगह जिम्मेदारी हम पर डाल दी जाती है।
वहीं अधिकारियों का कहना है कि यह निर्देश सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत है, जिसमें स्कूल परिसरों को बच्चों के लिए सुरक्षित रखने को कहा गया है।
इसलिए संस्थानों को आवारा जानवरों व जहरीले जीवों का प्रवेश रोकने के उपाय करने होंगे।चिंता यह भी जताई जा रही है कि पहले ही शिक्षकों पर पढ़ाई, सर्वे, विभिन्न सरकारी योजनाओं की रिपोर्टिंग और गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ है। अब सांप-बिच्छुओं की निगरानी की जिम्मेदारी जोड़ दिए जाने से यह बोझ और बढ़ेगा।
विभागीय पक्ष का कहना है कि निर्देश का उद्देश्य केवल सतर्कता बढ़ाना है, लेकिन शिक्षक संगठनों ने आदेश में स्पष्टता और सुरक्षा इंतज़ाम जोड़ने की मांग उठाई है। कई संगठन जल्द ही शासन से इस निर्देश पर पुनर्विचार की मांग करने की तैयारी में हैं।