नई दिल्ली। देश में होने वाली अगली जनगणना पर इस बार प्रति व्यक्ति औसतन 82 रुपए का खर्च आएगा। यह राशि 2011 की जनगणना के मुकाबले लगभग पांच गुना अधिक है। केंद्र सरकार की ओर से संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, बढ़ती लागत, डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल और व्यापक तैयारियों के कारण जनगणना पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ा है।
2011 के मुकाबले क्यों बढ़ा खर्च?
वर्ष 2011 की जनगणना में प्रति व्यक्ति खर्च बेहद कम था, लेकिन इस बार आंकड़ा सीधे 82 रुपए तक पहुंच गया है। सरकार के मुताबिक, इस बढ़ोतरी के पीछे कई बड़े कारण हैं-
*जनसंख्या में बढ़ोतरी
*डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल
*डेटा संग्रह और प्रोसेसिंग की आधुनिक व्यवस्था
*कर्मचारियों के मानदेय और प्रशिक्षण पर बढ़ा खर्च
2021 में तय हुआ था 64 रुपए प्रति व्यक्ति बजट–
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि 2021 की प्रस्तावित जनगणना के लिए पहले प्रति व्यक्ति 64 रुपए खर्च का अनुमान लगाया गया था। हालांकि, कोविड महामारी, प्रक्रिया में देरी और महंगाई बढ़ने के कारण अब यह राशि बढ़कर 82 रुपए प्रति व्यक्ति हो गई है।
डिजिटल होगी अगली जनगणना–
अगली जनगणना को अब तक की सबसे आधुनिक और तकनीक आधारित जनगणना बताया जा रहा है। इसमें मोबाइल ऐप, डिजिटल डिवाइस और ऑनलाइन डेटा एंट्री जैसे माध्यमों का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे आंकड़ों की सटीकता बढ़ेगी और समय की बचत होगी।
सरकार का तर्क–
सरकार का कहना है कि बढ़ा हुआ खर्च केवल आंकड़े जुटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे देश की योजनाओं, संसाधन आवंटन और नीति निर्माण को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। सटीक जनसंख्या आंकड़ों से शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और रोजगार योजनाओं की बेहतर योजना बनाई जा सकेगी।
कुल मिलाकर जहां एक ओर प्रति व्यक्ति खर्च में भार–
बढ़ोतरी को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं सरकार इसे भविष्य की योजनाओं के लिए जरूरी निवेश बता रही है। आने वाली जनगणना न केवल खर्च के लिहाज से, बल्कि तकनीक और दायरे के हिसाब से भी अब तक की सबसे बड़ी कवायद होगी।