सिनेमा का काम समाज से संवाद करना है’: प्रकाश झा की बयानबाजी और नए प्रोजेक्ट अपडेट…

मनोरंजन। बॉलीवुड के जाने-माने निर्देशक प्रकाश झा का मानना है कि सिनेमा सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज और जनता के साथ संवाद करने का एक शक्तिशाली जरिया है। उन्होंने बार-बार कहा है कि उनकी फिल्मों में राजनीति और सामाजिक मुद्दों को इसलिए जगह मिलती है क्योंकि वे उस यथार्थ को दर्शकों तक पहुंचाना चाहते हैं जो रोज-मर्रा की जिंदगी और हमारे सिस्टम से जुड़ा होता है।

झा ने पहले भी बताया है कि उनकी फिल्मों में राजनीति और सामाजिक संघर्ष हमेशा एक गहरा संदेश रखते हैं – “मेरा काम सच को पर्दे पर लाना है, न कि डर के कारण बंदिशों में बाधित होना।” उनका मानना है कि अगर फिल्में सिर्फ डर के कारण बनेंगी, तो वे समाज की गंभीरता से जुड़ी आवाज़ नहीं उठा पाएंगी।

प्रकाश झा ने यह पुष्टि की है कि ‘राजनीति’ फिल्म के सीक्वल पर काम जारी है और इसकी स्क्रिप्ट विकसित हो रही है।

इस सीक्वल में राजनीतिक प्रणाली, सत्ता संघर्ष और सामाजिक बदलाव की और भी गहराई से पड़ताल होने वाली है। पुरानी फिल्म की तरह ही यह भी समाज तथा लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ा संदेश देगी – झा की सोच के अनुरूप कि सिनेमा समाज को प्रतिबिंबित करे।

उनके चर्चित फिल्म ‘गंगाजल’ का अगला भाग भी प्रगति पर है, जिसमें पुलिस और समाज की जटिल भूमिकाओं को दिखाया जाएगा।

प्रकाश झा द्वारा निर्देशित और निर्मित लोकप्रिय वेब सीरीज़ ‘आश्रम’ को नए सीज़न के लिए तैयार किया जा रहा है।

यह सीरीज़ बाबा निराला जैसे विवादास्पद चरित्रों के माध्यम से धर्म, सत्ता, विश्वास, राजनीति और समाज के बीच के जटिल रिश्तों को दिखाती है।

झा के अनुसार, इस शो में दर्शाए गए मुद्दे समाज के वास्तविक संघर्षों और विवादों की परछाईं हैं, इसलिए यह दर्शकों को सोचने के लिए मजबूर करती है।

झा अक्सर कहते हैं कि अगर फिल्मकार सिर्फ “डर” की वजह से फिल्म बनाते हैं  चाहे वह राजनीतिक दबाव हो या सामाजिक आलोचना – तो वह वास्तविकता को नहीं दिखा पाएंगे। सेंसरशिप, विरोध और आलोचना के डर से फ़िल्में आकारहीन हो जाती हैं – वही कारण है कि वे सीधे सवाल खड़े करने वाली कहानियां बनाना पसंद करते हैं।

उनके अनुसार सिनेमा का मूल काम है समाज की आवाज़ को परदे पर लाना, सवाल पूछना और जवाब ढूँढना। सिनेमा सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि चिंतन, सवाल और बदलाव के विचारों का जरिया भी है।

प्रकाश झा का मानना है कि सिनेमा का असली काम समाज के साथ संवाद करना है।  डर के कारण फिल्में नहीं बनती – इसलिए वे सामाजिक-राजनीतिक विषयों पर फिल्में और सीरीज़ बनाते हैं जो जनता के लिए महत्वपूर्ण हैं।

फिलहाल उनके पास ‘राजनीति 2’ और ‘गंगाजल’ जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स की योजना है, जिनमें राजनीतिक और सामाजिक संदेशों को और विस्तृत रूप से दिखाया जाएगा। वेब सीरीज ‘आश्रम’ का नया सीजन भी देखने की तैयारी में है, जो दर्शकों को फिर से व्यस्त करेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *