ऑपरेटिंग कॉस्ट का करीब 40% तक एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) पर जाता है, जबकि मेंटेनेंस, विमान लीज, कर्मचारियों के वेतन और एयरपोर्ट शुल्क भी बड़े खर्चे हैं।
नई दिल्ली। भारतीय विमानन क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन एयरलाइंस की कमाई का बड़ा हिस्सा परिचालन खर्चों में ही निकल जाता है। नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) के आंकड़ों के अनुसार एयरलाइंस के कुल ऑपरेटिंग खर्च में सबसे बड़ा हिस्सा एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) का होता है, जिस पर लगभग 40 प्रतिशत तक राशि खर्च होती है।
इसके अलावा विमानों की लीजिंग, रखरखाव (मेंटेनेंस), इंजन और स्पेयर पार्ट्स, पायलट व केबिन क्रू का वेतन, एयरपोर्ट शुल्क तथा अन्य परिचालन खर्च भी एयरलाइंस के बजट का बड़ा हिस्सा खा जाते हैं। ICRA की रिपोर्ट के मुताबिक विमानन कंपनियों के कुल खर्च का 45 से 60 प्रतिशत हिस्सा डॉलर आधारित भुगतान से जुड़ा होता है, जिससे रुपये में कमजोरी आने पर लागत और बढ़ जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव एयरलाइंस की लाभप्रदता पर सीधा असर डालता है। हाल के वर्षों में बढ़ती ATF कीमतों और वैश्विक परिस्थितियों के कारण कई एयरलाइंस को लागत नियंत्रण के लिए अतिरिक्त कदम उठाने पड़े हैं।
DGCA के आंकड़े बताते हैं कि यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन बढ़ती लागत के कारण एयरलाइंस के लिए मुनाफा बनाए रखना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।