चेन्नई। तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर जारी सियासी गतिरोध के बीच अब DMK और VCK जैसे दल भी थलापति विजय के समर्थन में खुलकर सामने आ गए हैं। राज्यपाल द्वारा अभी तक विजय को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित नहीं किए जाने पर विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाए हैं और इसे “जनादेश का अपमान” बताया है।
तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) ने विधानसभा चुनाव में 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने में सफलता हासिल की, लेकिन बहुमत के आंकड़े 118 से अभी भी पीछे है। कांग्रेस के 5 विधायकों के समर्थन के बाद भी पार्टी को बहुमत के लिए और समर्थन की जरूरत है।
मक्कल नीधि मय्यम प्रमुख कमल हासन ने कहा कि सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद विजय को सरकार बनाने का मौका नहीं देना जनता के फैसले का अपमान होगा। उन्होंने कहा कि “233 निर्वाचित सदस्य अब तक शपथ नहीं ले पाए हैं, यह लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।”
VCK प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने भी राज्यपाल के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि विजय को पहले शपथ दिलाई जानी चाहिए और बहुमत परीक्षण विधानसभा में होना चाहिए, न कि राजभवन में। DMK नेताओं ने भी यही दलील दी कि जब कोई गठबंधन बहुमत में नहीं है तो सबसे बड़ी पार्टी को पहले मौका मिलना चाहिए।
सूत्रों के मुताबिक DMK प्रमुख एमके स्टालिन ने अपने सहयोगी दलों को TVK के समर्थन को लेकर स्वतंत्र फैसला लेने की छूट दे दी है। इसी के बाद VCK और वामदलों की सक्रियता बढ़ गई है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि तमिलनाडु की राजनीति में तेजी से नए समीकरण बन रहे हैं और आने वाले कुछ दिनों में सरकार गठन को लेकर बड़ा फैसला सामने आ सकता है।