तीन महीने से कमजोर था स्कूल का गेट, फिर भी नहीं हुई मरम्मत; तीज मनाने मामा के घर आए मासूम शिवम की मौत
बलौदाबाजार/हथबंद। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले के हथबंद से स्कूल परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करने वाला दर्दनाक मामला सामने आया है। स्वामी आत्मानंद शासकीय विद्यालय का भारी लोहे का मुख्य गेट अचानक गिरने से सात वर्षीय शिवम यादव की मौत हो गई। शिवम तीज पर्व पर अपने परिजनों के यहां हथबंद आया हुआ था और हादसे के वक्त स्कूल के पास अन्य बच्चों के साथ खेल रहा था।
जानकारी के मुताबिक शिवम मूल रूप से रतनपुर का रहने वाला था। तीज पर्व के अवसर पर वह परिवार के साथ हथबंद आया था। घर से करीब 400 मीटर की दूरी पर स्थित स्कूल के पास वह अन्य बच्चों के साथ खेल रहा था। इसी दौरान वह स्कूल के मुख्य गेट के पास पहुंचा और अचानक भारी लोहे का गेट गिर गया। गेट की चपेट में आने से शिवम की मौके पर ही मौत हो गई।
तीन महीने से जर्जर था गेट, ग्रामीणों ने उठाए सवाल
हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल के मुख्य गेट को संभालने वाला कॉलम करीब तीन महीने से जर्जर हालत में था। बताया गया कि गेट का सहारा देने वाला हिस्सा कमजोर हो चुका था और वह कथित तौर पर एक पट्टी और कील के सहारे टिका हुआ था। इसके बावजूद समय रहते उसकी मरम्मत नहीं कराई गई।
ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि जब स्कूल में बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ी जिम्मेदारी है, तो जर्जर गेट को समय रहते हटाकर नया इंतजाम क्यों नहीं किया गया। ग्रामीणों के मुताबिक शाला विकास समिति की ओर से विद्यार्थियों से वार्षिक विकास शुल्क भी लिया जाता है। इसके बावजूद स्कूल के बुनियादी ढांचे की मरम्मत में कथित लापरवाही गंभीर चिंता का विषय है।
मौके पर पहुंचे एसडीएम, एफआईआर के निर्देश
हादसे की सूचना मिलते ही सिमगा एसडीएम अतुल शेटे मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जांच के आधार पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर और वैधानिक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
पुलिस ने बच्चे के शव का पंचनामा तैयार कर पोस्टमार्टम के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिमगा भेजा। मामले में पुलिस की जांच जारी है और हादसे के लिए जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया चल रही है।
परिवार को 70 हजार रुपये की तत्काल सहायता
हादसे के बाद प्रशासन की ओर से पीड़ित परिवार को 50 हजार रुपये की अंतरिम सहायता दी गई। वहीं स्कूल प्रबंधन की ओर से अंतिम संस्कार के लिए 20 हजार रुपये दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
मासूम की मौत ने परिवार के साथ-साथ पूरे इलाके को झकझोर दिया है। ग्रामीणों की मांग है कि स्कूल के जर्जर हिस्सों की तत्काल जांच कराई जाए और जिस स्तर पर लापरवाही हुई है, उसकी जिम्मेदारी तय कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी और बच्चे की जान खतरे में न पड़े।