देहरादून। उत्तराखंड में आगामी कुंभ मेले को लेकर सियासत और सामाजिक बहस तेज हो गई है। कई हिंदू संगठनों ने कुंभ मेले में मुस्लिमों की एंट्री पर रोक लगाने की मांग उठाई है। संगठनों का कहना है कि कुंभ पूरी तरह धार्मिक आयोजन है, ऐसे में 1936 के कुंभ अधिनियम को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए।
हिंदू संगठनों का दावा है कि कुंभ की परंपरा और धार्मिक मर्यादा बनाए रखने के लिए गैर-हिंदुओं की भागीदारी पर प्रतिबंध जरूरी है। उन्होंने प्रशासन से स्पष्ट नियम बनाने और पहचान के आधार पर एंट्री सुनिश्चित करने की मांग की है।
वहीं इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संयमित प्रतिक्रिया दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मामला संवेदनशील है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर ही कोई फैसला लिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार कानून, सामाजिक सौहार्द और संविधान के दायरे में रहकर निर्णय करेगी।
इधर, विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने इस मांग को संविधान और धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ बताया है। उनका कहना है कि कुंभ एक सार्वजनिक धार्मिक आयोजन है और इसमें किसी समुदाय विशेष को बाहर करना सामाजिक विभाजन को बढ़ावा दे सकता है।
प्रशासनिक स्तर पर फिलहाल कोई औपचारिक आदेश जारी नहीं किया गया है, लेकिन इस मुद्दे पर सरकार, कानून विशेषज्ञों और धार्मिक संतों से चर्चा की संभावना जताई जा रही है।
अब नजरें राज्य सरकार के फैसले पर टिकी हैं कि वह ऐतिहासिक कानून को लागू करती है या मौजूदा परिस्थितियों के अनुसार कोई नया रास्ता निकालती है।