रूस से तेल खरीदने पर भारत पर 100% टैरिफ की तलवार, अमेरिकी सांसद ने संशोधन में भारत का नाम जोड़ा…

रूस पर शिकंजा कसने वाले विधेयक में भारत समेत 10 देशों को सीधे निशाने पर लेने का प्रस्ताव; सदन में अभी होना है फैसला

वॉशिंगटन। रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की अमेरिकी कोशिशों के बीच भारत को लेकर एक नया प्रस्ताव सामने आया है। अमेरिकी कांग्रेस में रूस पर प्रतिबंधों से जुड़े विधेयक में संशोधन पेश किया गया है, जिसमें भारत समेत 10 देशों के नाम शामिल किए गए हैं। प्रस्ताव के तहत रूस से बड़े पैमाने पर तेल खरीदने वाले इन देशों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाया जा सकता है।

यह संशोधन डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद स्टेनी होयर ने पेश किया है। इसमें भारत के साथ चीन, तुर्किये, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाकिया, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, कजाखस्तान और किर्गिस्तान को उन देशों की सूची में शामिल करने का प्रस्ताव है, जिन पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाया जा सकता है।

सीनेट में पहले ही पास हो चुका है विधेयक

यह पूरा मामला Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act से जुड़ा है। अमेरिकी सीनेट ने इस विधेयक को 7 अगस्त को 86-11 के भारी बहुमत से मंजूरी दी थी। विधेयक का उद्देश्य रूस के नेतृत्व, ऊर्जा क्षेत्र और उन जहाजों पर कार्रवाई करना है, जिन्हें प्रतिबंधों से बचकर रूसी तेल की आपूर्ति में इस्तेमाल होने वाला ‘शैडो फ्लीट’ माना जाता है।

अमेरिका का तर्क है कि रूस की कच्चे तेल की बिक्री से मिलने वाला राजस्व यूक्रेन युद्ध के लिए उसकी आर्थिक क्षमता को मजबूत करता है। इसी वजह से रूस के प्रमुख तेल खरीदार देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

भारत का नाम मूल सीनेट बिल में नहीं था

खास बात यह है कि सीनेट से पारित मूल विधेयक में रूस के व्यापारिक साझेदार देशों के नाम सीधे नहीं दिए गए थे। उसमें रूस से तेल और गैस के सबसे बड़े आयातकों का उल्लेख किया गया था। अब प्रतिनिधि सभा में पेश संशोधन के जरिए भारत समेत देशों को स्पष्ट रूप से नामित करने की कोशिश की गई है।

यदि यह संशोधन और संबंधित प्रावधान अंतिम कानून का हिस्सा बनते हैं, तो अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस के प्रमुख ऊर्जा खरीदारों पर भारी टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है।

एक और सांसद ने टैरिफ वाला प्रावधान हटाने की मांग की

इसी बीच डेमोक्रेटिक सांसद ग्रेगरी मीक्स ने इसके बिल्कुल उलट संशोधन पेश किया है। उन्होंने विधेयक की धारा 113 को पूरी तरह हटाने का प्रस्ताव दिया है। यही धारा राष्ट्रपति को रूस के व्यापारिक साझेदारों पर व्यापक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार देने से जुड़ी है।

मीक्स ने एक अन्य संशोधन के जरिए कुछ परिस्थितियों में विदेशी व्यक्तियों पर लागू प्रतिबंधों को 90 दिनों के लिए हटाने की राष्ट्रपति को अनुमति देने का प्रस्ताव भी रखा है। जरूरत पड़ने पर इसे आगे भी 90-90 दिनों के लिए बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा उन्होंने यूक्रेन को रक्षा सामग्री खरीदने के लिए 15 अरब डॉलर के प्रत्यक्ष ऋण की अनुमति देने का प्रस्ताव भी रखा है।

अब आगे क्या होगा?

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा को इस विधेयक और उसके संशोधनों पर फैसला करना है। विधेयक के राष्ट्रपति तक पहुंचने से पहले सदन की मंजूरी जरूरी है। अमेरिकी संसद के मौजूदा कार्यक्रम के मुताबिक सदन के पास मध्यावधि चुनाव से पहले सीमित कार्यदिवस बचे हैं। इसलिए आने वाले दिनों में यह मुद्दा अमेरिकी विदेश नीति के साथ-साथ भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

हालांकि, अभी भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लागू नहीं हुआ है। फिलहाल भारत का नाम उस प्रस्तावित संशोधन में शामिल किया गया है। अंतिम कानून में कौन-कौन से प्रावधान शामिल होंगे, यह प्रतिनिधि सभा की प्रक्रिया और आगे होने वाले फैसलों पर निर्भर करेगा।

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