तमिलनाडु की राजनीति में साल 2011 का एक फैसला आज भी सबसे चर्चित राजनीतिक फैसलों में गिना जाता है। सत्ता में आते ही जयललिता सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री करुणानिधि के भव्य विधानसभा भवन को अस्पताल में बदलने का ऐलान कर सबको चौंका दिया था।
तमिलनाडु। तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता ने 2011 में सत्ता संभालने के बाद बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक फैसला लेते हुए नई विधानसभा-सचिवालय इमारत को मल्टी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में बदलने का निर्णय लिया था। यह भवन तत्कालीन मुख्यमंत्रीतमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता ने 2011 में सत्ता संभालने के बाद बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक फैसला लेते हुए नई विधानसभा-सचिवालय इमारत को मल्टी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में बदलने का निर्णय लिया था। यह भवन तत्कालीन मुख्यमंत्री एम करुणा निधि का ड्रीम प्रोजेक्ट माना जाता था।
करीब 1200 करोड़ रुपये की लागत से बने इस अत्याधुनिक विधानसभा परिसर का उद्घाटन 2010 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंग ने किया था। लेकिन 2011 में AIADMK सरकार बनने के बाद जयललिता ने विधानसभा की कार्यवाही फिर से Fort St. George परिसर में कराने का फैसला लिया।
जयललिता सरकार ने तर्क दिया था कि नया भवन सभी सरकारी विभागों को समायोजित करने के लिए पर्याप्त नहीं है और इसे जनता के हित में अस्पताल व मेडिकल कॉलेज के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने कहा था कि यह अस्पताल AIIMS की तर्ज पर विकसित किया जाएगा ताकि गरीबों को बेहतर इलाज मिल सके।
इस फैसले को लेकर उस समय तमिलनाडु की राजनीति में जबरदस्त विवाद हुआ था। DMK ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया, जबकि AIADMK ने इसे जनहित का फैसला कहा। बाद में इसी परिसर में तमिलनाडु गवर्नमेंट मल्टी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल शुरू किया गया।