धमतरी। सरकारी दफ्तरों में आमतौर पर किसी नए भवन, कार्यालय या सुविधा के उद्घाटन के लिए वरिष्ठ अधिकारी या जनप्रतिनिधि फीता काटते हैं। लेकिन धमतरी कलेक्ट्रेट में इस परंपरा से अलग पहल देखने को मिली। यहां कलेक्टर अविनाश मिश्रा ने खुद उद्घाटन करने के बजाय उस कर्मचारी को यह जिम्मेदारी सौंपी, जो लंबे समय से कलेक्ट्रेट सभाकक्ष की देखरेख और वहां होने वाली बैठकों की व्यवस्थाएं संभालता आ रहा है।
कलेक्टर ने खुद नहीं काटा फीता, जिस कर्मचारी ने संभाली व्यवस्था उसी से कराया सभाकक्ष का उद्घाटन
रेनोवेशन के बाद तैयार हुए कलेक्ट्रेट के नए सभाकक्ष का फीता चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी रूपेश कुलदीप ने काटा। कलेक्टर की इस पहल को कर्मचारियों के सम्मान और प्रशासनिक व्यवस्था में हर स्तर पर काम करने वाले लोगों की भूमिका को पहचान देने से जोड़कर देखा जा रहा है। उद्घाटन के दौरान ईश्वरी मंडावी और घनश्याम कुलदीप भी मौजूद रहे।
लंबे समय से सभाकक्ष की व्यवस्था संभाल रहे थे रूपेश
रूपेश कुलदीप लंबे समय से कलेक्ट्रेट सभाकक्ष की देखरेख से जुड़े हैं। अधिकारियों की बैठक हो या अन्य प्रशासनिक गतिविधियां, सभाकक्ष में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने में उनकी भूमिका रहती है। इसी योगदान को देखते हुए कलेक्टर अविनाश मिश्रा ने रेनोवेशन के बाद सभाकक्ष के उद्घाटन का अवसर उन्हें देने का निर्णय लिया।
इस पहल के जरिए प्रशासन की ओर से यह संदेश देने की कोशिश की गई कि सरकारी व्यवस्था केवल अधिकारियों के निर्णयों से नहीं चलती, बल्कि अलग-अलग स्तर पर जिम्मेदारी निभाने वाले कर्मचारियों का योगदान भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
आधुनिक सुविधाओं से लैस हुआ सभाकक्ष
कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में रेनोवेशन के दौरान बैठक और प्रशासनिक कामकाज को ध्यान में रखते हुए सुविधाओं को बेहतर किया गया है। सभाकक्ष में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सहित आधुनिक तकनीकी सुविधाएं जोड़े जाने की जानकारी सामने आई है।
अब यहां विभागीय समीक्षा बैठक, अधिकारियों के साथ प्रशासनिक बैठक, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और अन्य शासकीय गतिविधियां अधिक व्यवस्थित तरीके से संचालित की जा सकेंगी। आधुनिक तकनीकी सुविधाओं से अधिकारियों के बीच संवाद और विभिन्न विभागों के समन्वय को भी बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
कलेक्टर की पहल ने दिया सम्मान का संदेश
सभाकक्ष के उद्घाटन के लिए वरिष्ठ अधिकारी के बजाय चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को आगे करने की पहल ने पूरे कार्यक्रम को खास बना दिया। इससे यह संदेश गया कि प्रशासनिक व्यवस्था में पद भले अलग-अलग हों, लेकिन हर कर्मचारी की जिम्मेदारी और योगदान महत्वपूर्ण है।
कलेक्टर अविनाश मिश्रा की इस पहल को कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाने वाली पहल के रूप में भी देखा जा रहा है। जिस सभाकक्ष की व्यवस्था रूपेश कुलदीप लंबे समय से संभालते रहे, उसी के नए स्वरूप का उद्घाटन करने का अवसर भी उन्हें दिया गया।