देशभर में 14,488 छात्रों ने की आत्महत्या; पढ़ाई का दबाव, करियर की चिंता और मानसिक तनाव बड़ी वज़ह बनकर उभरे; विशेषज्ञों ने शिक्षा व्यवस्था और पैरेंट्स के रवैये पर उठाए सवाल…

NCRB रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: 2024 में छात्र आत्महत्या के मामलों ने तोड़ा रिकॉर्ड

नई दिल्ली। देश में छात्रों के बीच बढ़ता मानसिक दबाव अब गंभीर सामाजिक संकट बनता जा रहा है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2024 में भारत में 14,488 छात्रों ने आत्महत्या की, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है। यह संख्या 2023 की तुलना में करीब 4.3 प्रतिशत अधिक है।

रिपोर्ट के अनुसार, देश में कुल आत्महत्याओं के आंकड़ों में मामूली गिरावट दर्ज की गई, लेकिन छात्रों के आत्महत्या मामलों में लगातार बढ़ोतरी चिंता बढ़ा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा का दबाव, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, करियर को लेकर असुरक्षा, पारिवारिक अपेक्षाएं और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता की कमी इसके प्रमुख कारण हैं।

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आज के दौर में छात्र केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया, तुलना की मानसिकता और भविष्य की अनिश्चितता के दबाव से भी जूझ रहे हैं। खासकर NEET-JEE जैसे एग्जाम की तैयारी करने वाले छात्रों में तनाव के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। राजस्थान का कोटा एक बार फिर चर्चा में है, जहां लगातार छात्र आत्महत्या की घटनाएं सामने आती रही हैं।

NCRB के पुराने आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले एक दशक में छात्र आत्महत्याओं में लगभग 65 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। 2013 में जहां यह आंकड़ा करीब 8,423 था, वहीं अब यह बढ़कर 14 हजार के पार पहुंच गया है। यह बढ़ोतरी देश में कुल आत्महत्या वृद्धि दर से भी कहीं ज्यादा तेज मानी जा रही है।

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने स्कूलों, कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों में प्रोफेशनल काउंसलिंग सिस्टम मजबूत करने की जरूरत बताई है। साथ ही अभिभावकों से बच्चों पर जरूरत से ज्यादा दबाव न बनाने और उनके व्यवहार में बदलाव को गंभीरता से लेने की अपील की गई है।

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