याचिका में राज्य नियंत्रित मंदिरों के पुजारियों और कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा और कर्मचारी का दर्जा देने की मांग उठाई गई है।
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर कर राज्य नियंत्रित मंदिरों में कार्यरत पुजारियों, सेवादारों और कर्मचारियों के वेतन व सुविधाओं की समीक्षा के लिए न्यायिक आयोग या विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग की गई है।
याचिका अधिवक्ता अश्वनी कुमार उपाध्याय की ओर से दायर की गई है। इसमें मांग की गई है कि मंदिर कर्मचारियों को वेतन संहिता 2019 के तहत “कर्मचारी” का दर्जा दिया जाए, ताकि उन्हें न्यूनतम वेतन, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा जैसी सुविधाएं मिल सकें।
याचिका में दावा किया गया है कि कई राज्यों में मंदिरों का प्रशासन और वित्तीय नियंत्रण सरकार के पास होने के बावजूद पुजारियों और कर्मचारियों को बेहद कम मानदेय दिया जा रहा है। कई जगह उनकी आय केवल दक्षिणा पर निर्भर है।
PIL में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में मंदिर कर्मचारियों के विरोध प्रदर्शन का भी जिक्र किया गया है। साथ ही कहा गया है कि बढ़ती महंगाई के बीच पुजारियों की आर्थिक स्थिति लगातार खराब होती जा रही है।