21वीं पशुधन जनगणना रिपोर्ट में फिर देरी; तकनीकी गड़बड़ी और डेटा वैलिडेशन बना वज़ह; जून के बाद ज़ारी होने की उम्मीद…

30 करोड़ से ज्यादा घरों का डिजिटल सर्वे पूरा, लेकिन डेटा कंपाइलिंग में आई दिक्कतों के कारण अटक गई देश की सबसे अहम पशुधन रिपोर्ट।

नई दिल्ली। देश की 21वीं Livestock Census Report एक बार फिर देरी का शिकार हो गई है। केंद्र सरकार की यह महत्वपूर्ण रिपोर्ट पिछले साल के अंत तक जारी होने वाली थी, लेकिन तकनीकी गड़बड़ियों और डेटा वैलिडेशन की समस्याओं के चलते अब इसके जून 2026 के बाद जारी होने की संभावना जताई जा रही है।

सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल जुटाए गए आंकड़ों की जांच और सत्यापन प्रक्रिया चल रही है। डेटा में कई तकनीकी त्रुटियां सामने आने के बाद रिपोर्ट को अंतिम रूप देने में अतिरिक्त समय लग रहा है।

21वीं पशुधन जनगणना की शुरुआत 25 अक्टूबर 2024 को हुई थी। इस दौरान देशभर के 30 करोड़ से ज्यादा घरों में जाकर गाय, भैंस, बकरी, भेड़, सूअर, पोल्ट्री और अन्य पालतू पशुओं की गिनती की गई। खास बात यह रही कि इस बार पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाया गया था और मोबाइल ऐप व वेब एप्लिकेशन के जरिए डेटा इकट्ठा किया गया।

सरकार का कहना है कि यह रिपोर्ट सिर्फ पशुओं की संख्या बताने तक सीमित नहीं होती, बल्कि इससे डेयरी सेक्टर, पशुपालन योजनाओं, टीकाकरण अभियान, नस्ल सुधार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ी नीतियां तय की जाती हैं। इसलिए डेटा की सटीकता बेहद जरूरी है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार डिजिटल सिस्टम लागू होने से प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद थी, लेकिन तकनीकी स्तर पर डेटा सिंक्रोनाइजेशन, वैलिडेशन और सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन जैसी दिक्कतें सामने आईं। इससे रिपोर्ट तय समय पर जारी नहीं हो सकी। पहले भी 20वीं Livestock Census के दौरान टैबलेट और सॉफ्टवेयर से जुड़ी समस्याओं के कारण देरी हुई थी।

यह जनगणना हर पांच साल में कराई जाती है और इसका उपयोग सरकार पशुधन आधारित योजनाओं का बजट तय करने, दुग्ध उत्पादन का अनुमान लगाने और ग्रामीण रोजगार की रणनीति बनाने में करती है। रिपोर्ट में राज्यवार और प्रजातिवार आंकड़े जारी किए जाते हैं, जिन पर कृषि और डेयरी सेक्टर की कई नीतियां आधारित होती हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *