शी जिनपिंग की टिप्पणी पर ट्रंप ने बाइडन प्रशासन को ठहराया जिम्मेदार
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने वैश्विक राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका वास्तव में “गिरावट की ओर बढ़ता राष्ट्र” बन गया था, लेकिन इसके लिए उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के कार्यकाल को जिम्मेदार ठहराया। यह बयान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की उस टिप्पणी के बाद आया, जिसमें उन्होंने अमेरिका को “declining nation” बताया था।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि शी जिनपिंग का इशारा उनके शासनकाल की ओर नहीं, बल्कि बाइडन प्रशासन के दौरान अमेरिका को हुए नुकसान की तरफ था। उन्होंने दावा किया कि खुली सीमाएं, महंगाई, अपराध और गलत नीतियों ने अमेरिका को कमजोर किया, जबकि उनके नेतृत्व में देश फिर से आर्थिक और सैन्य ताकत बन रहा है।
बीजिंग में ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात के दौरान दोनों देशों के संबंध, ताइवान मुद्दा और वैश्विक शक्ति संतुलन पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि “अमेरिका के पतन” जैसी टिप्पणी चीन की बढ़ती वैश्विक महत्वाकांक्षा और अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा को दर्शाती है।
ट्रंप के बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। आलोचकों ने इसे अमेरिका की वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचाने वाला बताया, जबकि समर्थकों का कहना है कि ट्रंप केवल पिछली सरकार की नीतियों की आलोचना कर रहे थे।
अमेरिका बन चुका था कमजोर देश; ट्रंप के बयान से मचा वैश्विक सियासी बवाल…
शी जिनपिंग की टिप्पणी पर ट्रंप ने बाइडन प्रशासन को ठहराया जिम्मेदार
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने वैश्विक राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका वास्तव में “गिरावट की ओर बढ़ता राष्ट्र” बन गया था, लेकिन इसके लिए उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के कार्यकाल को जिम्मेदार ठहराया। यह बयान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की उस टिप्पणी के बाद आया, जिसमें उन्होंने अमेरिका को “declining nation” बताया था।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि शी जिनपिंग का इशारा उनके शासनकाल की ओर नहीं, बल्कि बाइडन प्रशासन के दौरान अमेरिका को हुए नुकसान की तरफ था। उन्होंने दावा किया कि खुली सीमाएं, महंगाई, अपराध और गलत नीतियों ने अमेरिका को कमजोर किया, जबकि उनके नेतृत्व में देश फिर से आर्थिक और सैन्य ताकत बन रहा है।
बीजिंग में ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात के दौरान दोनों देशों के संबंध, ताइवान मुद्दा और वैश्विक शक्ति संतुलन पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि “अमेरिका के पतन” जैसी टिप्पणी चीन की बढ़ती वैश्विक महत्वाकांक्षा और अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा को दर्शाती है।
ट्रंप के बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। आलोचकों ने इसे अमेरिका की वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचाने वाला बताया, जबकि समर्थकों का कहना है कि ट्रंप केवल पिछली सरकार की नीतियों की आलोचना कर रहे थे।