पाकिस्तान। पाकिस्तान में प्रशासनिक ढांचे के बड़े पुनर्गठन की अटकलों ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। चर्चा है कि देश को 12 नए राज्यों/प्रांतों में बांटने पर विचार चल रहा है, ताकि शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी और प्रांतीय असमानताओं को कम किया जा सके।
लेकिन इस प्रस्ताव ने देश की सियासत में विवाद खड़ा कर दिया है। पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो की पार्टी पीपुल्स पार्टी (PPP) ने इस योजना का कड़ा विरोध किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि सिंध की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान किसी भी राजनीतिक प्रयोग का हिस्सा नहीं बन सकती।
PPP नेताओं ने दो-टूक कहा-
“अल्लाह के अलावा कोई सिंध को बांट नहीं सकता। यह प्रदेश हमारी विरासत, हमारी अस्मिता है।”
उनका आरोप है कि केंद्र सरकार जनता का ध्यान भटकाने और मौजूदा आर्थिक संकट को छिपाने के लिए ऐसे मुद्दे उछाल रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर पाकिस्तान में यह विभाजन योजना आगे बढ़ती है तो देश की भू-राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। वहीं विपक्ष का कहना है कि ऐसी योजनाएँ राष्ट्रीय एकता को कमजोर कर सकती हैं।
फिलहाल यह मुद्दा पाकिस्तान की राजनीति में गरमाया हुआ है और आने वाले दिनों में इसके और भी बड़े राजनीतिक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।