अंबिकापु। साल के पहले ही दिन सरगुजा जिले के सीतापुर थाना क्षेत्र में एक दु:खद और चुनौतीपूर्ण स्थिति सामने आई है, जहाँ एक युवक की तालाब में डूबने से मौत के बाद परिजनों को उसका शव खाट पर रखकर कई किलोमीटर पैदल मुख्य मार्ग तक ले जाना पड़ा क्योंकि गाँव तक कोई सड़क नहीं है।
ग्राम भरतपुर-लकरालता टोला का युवा सुरेंद्र तिर्की (उम्र लगभग 20-25 वर्ष) अपने गाँव के पास स्थित छोटे तालाब में नहाते समय डूब गया। स्थानीय ग्रामीणों और परिजनों ने जलाशय में उसकी लाश को बाहर निकाला।
शव मिलने के बाद प्रशासनिक आवश्यकताओं को पूरी करने हेतु उसे पुलिस और स्वास्थ्य विभाग द्वारा पोस्टमॉर्टम के लिए सीतापुर या मुख्य मार्ग तक पहुँचाना आवश्यक था। लेकिन इलाके में कोई सड़क नहीं होने की वजह से शव वाहन मौके तक नहीं पहुँच सका। स्थानीय ग्रामीणों की कई शिकायतों के बावजूद मार्ग नहीं मिला।
शव वाहन न पहुँचने पर परिवार और ग्रामीणों ने मिलकर खाट की कांवड़ पर शव को लादकर ढोना शुरू किया। उन्हें कठिन पहाड़ी व पगडंडी-जैसी रास्तों से लगभग ढाई से 5 किलोमीटर तक पैदल मुख्य मार्ग तक ले जाना पड़ा, जहाँ से आगे शव वाहन उपलब्ध हुआ और पोस्टमॉर्टम हो सका।
गौरतलब है कि यह इलाका दुर्गम, जंगल-आधारित और आदिवासी बहुल क्षेत्र है जहाँ वर्षों से सड़क, स्वास्थ्य, आपातकालीन सेवाएँ और बुनियादी सुविधाओं की कमी बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को बार-बार शिकायतें करने के बावजूद भी मार्ग नहीं बना, जिससे मौत के बाद भी परिजनों को मानवता को शर्मसार करने वाला संघर्ष करना पड़ा।
जैसा कि सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद राजनीति और आलोचना भी तेज हुई है, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जिसमें कहा गया है कि यह “विकास के खोखले दावों” का उदाहरण है और बुनियादी ढांचे के अभाव के कारण ऐसे दर्दनाक परिणाम सामने आए हैं।
ग्रामीणों के अनुसार यह सिर्फ एक व्यक्ति की मौत का मामला नहीं है, बल्कि समूचे इलाके में पहुँच, स्वास्थ्य, आपातकालीन सहायता के अभाव का परिणाम है। एक ग्रामीण ने कहा: अगर सड़क होती, तो शव वाहन सीधा गाँव तक आता और हमारी ये त्रासदी नहीं होती।
प्रशासन ने फिलहाल वीडियो वायरल होने और आलोचना के बाद घटना की जांच शुरू की है, और स्थानीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने हेतु बेहतर सड़क और बुनियादी ढांचा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। अंतिम दावे के रूप में अधिकारी आश्वासन दे रहे हैं, लेकिन धरातल पर सुधार की राह अभी लम्बी दिखाई दे रही है।
यह घटना छत्तीसगढ़ के दूरदराज़ आदिवासी इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की कमी विशेषकर सड़क, वाहन और स्वास्थ्य के प्रति पहुँच की कठोर सच्चाई को उजागर करती है। जहाँ एक युवक की डूबने से मौत अपने आप में दुःखद है, वहीं मृत्यु के बाद मृतक के परिजन का शव कई किमी तक पैदल ढोना मजबूर होना देशभर में प्रशासनिक नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।