नई दिल्ली। नई दिल्ली के मालवीय नगर स्थित फ्लोरिश स्टे होटल में लगी भीषण आग में मरने वालों की संख्या बढ़कर 22 हो गई है। इस दर्दनाक हादसे ने राजधानी में होटलों की सुरक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक निगरानी और भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि होटल में कई सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई थी, जिसके कारण मामूली आग कुछ ही मिनटों में जानलेवा त्रासदी में बदल गई।
जांच एजेंसियों के अनुसार होटल के पास वैध फायर एनओसी नहीं थी। भवन में केवल एक ही प्रवेश और निकास मार्ग था, जबकि आपातकालीन निकासी की पर्याप्त व्यवस्था भी नहीं थी। आग लगने के दौरान धुआं तेजी से पूरे भवन में फैल गया और कई लोग कमरों में फंस गए। कुछ लोगों ने जान बचाने के लिए ऊपरी मंजिलों से छलांग तक लगा दी।
मामले की जांच में यह भी सामने आया है कि होटल में लगाए गए इलेक्ट्रॉनिक लॉकिंग सिस्टम बिजली कटते ही निष्क्रिय हो गए, जिससे कई कमरों के दरवाजे नहीं खुल सके और लोग अंदर ही फंस गए। वहीं भवन में लगी टफेंड ग्लास पैनलिंग ने धुएं को बाहर निकलने से रोका, जिससे दम घुटने की घटनाएं बढ़ीं।
पुलिस ने होटल मालिक और प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। होटल के मैनेजर जय मिश्रा की तलाश की जा रही है, जबकि मालिक और उसकी पत्नी के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया है। जांच में लाइसेंस, स्वामित्व और सुरक्षा मंजूरियों से जुड़े दस्तावेजों की भी पड़ताल की जा रही है।
इस हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने राजधानी में फायर सेफ्टी नियमों का उल्लंघन करने वाली इमारतों और होटलों के खिलाफ विशेष अभियान चलाने की घोषणा की है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सुरक्षा मानकों का सही पालन किया गया होता तो इतनी बड़ी संख्या में लोगों की जान नहीं जाती।
यह त्रासदी केवल एक होटल में लगी आग नहीं, बल्कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही का ऐसा उदाहरण बन गई है जिसने पूरे देश को झकझोर दिया है।