सुप्रीम कोर्ट ने NGT के फैसले को बरकरार रखा: किरायेदार के पर्यावरणीय उल्लंघन के लिए मकान मालिक जिम्मेदार नहीं
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि कोई किरायेदार पर्यावरण संबंधी नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके लिए मकान मालिक को स्वतः जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने National Green Tribunal (NGT) के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें कहा गया था कि प्रदूषण या पर्यावरणीय क्षति की जवाबदेही उसी व्यक्ति या संस्था की होगी जो सीधे तौर पर उल्लंघन के लिए जिम्मेदार है।
मामला गुजरात के सूरत से जुड़ा था, जहां एक रासायनिक इकाई (केमिकल यूनिट) पर पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन के आरोप लगे थे। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इकाई संचालित करने वाले किरायेदार के साथ-साथ संपत्ति मालिक पर भी 25 लाख रुपये का पर्यावरणीय जुर्माना लगाया था। बाद में NGT ने यह जुर्माना रद्द करते हुए कहा कि मकान मालिक को केवल संपत्ति का मालिक होने के आधार पर दोषी नहीं माना जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने भी माना कि किसी व्यक्ति को तभी उत्तरदायी ठहराया जा सकता है जब उसके खिलाफ प्रत्यक्ष भूमिका, जानकारी या मिलीभगत के ठोस सबूत हों। केवल भवन का मालिक होना पर्यावरणीय उल्लंघन की जिम्मेदारी तय करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला देशभर के मकान मालिकों और औद्योगिक संपत्तियों के मालिकों के लिए महत्वपूर्ण मिसाल बनेगा। इससे यह स्पष्ट संदेश गया है कि पर्यावरण कानूनों के तहत जवाबदेही तय करते समय वास्तविक दोषी और उल्लंघन करने वाले पक्ष की पहचान जरुरी है।