रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान प्रश्नकाल में सोमवार को सड़क मरम्मत, स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। कांग्रेस और भाजपा के विधायकों ने अलग-अलग मुद्दों पर मंत्रियों को घेरा, जबकि मंत्रियों ने तथ्यों के साथ जवाब देने की कोशिश की।
कांग्रेस विधायक हर्षिता बघेल ने डोंगरगढ़ क्षेत्र सहित राजनांदगांव और खैरागढ़ जिलों की जर्जर सड़कों का मुद्दा उठाया। उन्होंने लोक निर्माण मंत्री अरुण साव के जवाब पर आपत्ति जताते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर किसी भी सड़क पर काम शुरू नहीं हुआ है।
इस पर मंत्री अरुण साव ने सदन को बताया कि दोनों जिलों में कुल 48 सड़कें चिन्हित की गई हैं। इनमें से 39 सड़कों के टेंडर हो चुके हैं, 4 सड़कों का कार्य पूर्ण कर लिया गया है और 5 सड़कों पर काम शुरू होना बाकी है।
हालांकि, विधायक हर्षिता बघेल ने मंत्री पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया। विवाद बढ़ने पर आसंदी को हस्तक्षेप करना पड़ा।
इसी प्रश्नकाल में जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव ने महारानी अस्पताल में प्रस्तावित कैंसर क्लिनिक और सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के निर्माण में हो रही देरी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि 12 जून 2025 को स्वीकृति मिलने के बावजूद अब तक केवल टेंडर प्रक्रिया ही चल रही है।
इसके जवाब में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि परियोजना की डीपीआर निजी एजेंसी से तैयार कराई जाती है और ईएनसी के माध्यम से स्वीकृति प्रक्रिया पूरी की जा रही है। मंत्री ने यह भी बताया कि पूर्व प्रवास के दौरान माताओं के लिए एमआरडी भवन की मांग के बाद उसमें भी स्वीकृति जोड़ी गई है।
इससे पहले सदन में राशन कार्ड गड़बड़ी, एपीएल कार्ड हटाकर बीपीएल बनाए जाने और धार्मिक संस्थानों की जमीन बिक्री जैसे मुद्दों पर भी तीखी बहस हुई, जिसमें कई भाजपा और कांग्रेस विधायक तथा खाद्य मंत्री व पर्यटन मंत्री के नाम भी चर्चा में आए।
बहरहाल प्रश्नकाल के दौरान सरकार की योजनाओं और उनके क्रियान्वयन को लेकर विपक्ष ने गंभीर सवाल उठाए, वहीं मंत्रियों ने आंकड़ों और प्रक्रियाओं का हवाला देकर जवाब दिया। तीखी बहस और आरोप-प्रत्यारोप के बीच सदन का माहौल लगातार गर्म बना रहा।