महिलाओं की सुरक्षा बेहतर हुई या सिर्फ़ आंकड़े बदले? NCRB रिपोर्ट ने छेड़ी बहस…

NCRB 2024 रिपोर्ट: महिलाओं के खिलाफ अपराध घटे या आंकड़ों का खेल?

नई दिल्ली। रिपोर्ट के मुताबिक NCRB 2024 के आंकड़े पहली नजर में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में कमी दिखाते हैं, लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि क्या सच में अपराध कम हुए हैं या फिर आंकड़ों की तस्वीर बदल गई है।

रिपोर्ट के अनुसार 2024 में महिलाओं के खिलाफ दर्ज मामलों में करीब 1.5% की गिरावट आई। 2023 में जहां लगभग 4.48 लाख मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2024 में यह संख्या करीब 4.41 लाख रही।

लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट पूरी तस्वीर नहीं बताती। खासतौर पर मणिपुर में अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय से जुड़े अपराधों और FIR दर्ज होने की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठे हैं। कई मामलों में शिकायतें तो सामने आईं, लेकिन FIR दर्ज कम हुईं, जिससे कुल आंकड़े नीचे दिखाई दे सकते हैं।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 2024 में भारतीय न्याय संहिता (BNS) लागू होने के बाद अपराधों की नई श्रेणियां बनाई गईं। इससे पुराने और नए आंकड़ों की तुलना सीधे तौर पर करना आसान नहीं रहा।

महिलाओं के खिलाफ सबसे ज्यादा मामले अब भी “पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता” के रहे, जो कुल मामलों का बड़ा हिस्सा हैं। इसके अलावा छेड़छाड़, अपहरण, यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म के मामलों की संख्या भी काफी अधिक बनी हुई है।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि साइबर अपराध और ऑनलाइन उत्पीड़न के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जबकि कई राज्यों में लंबित जांच और ट्रायल की संख्या चिंता का विषय बनी हुई है।

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