अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट और सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा, सीजफायर में मध्यस्थ बना पाकिस्तान गुपचुप तरीके से ईरान के सैन्य विमानों को अपने एयरबेस पर शरण देता रहा।
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव और नाजुक सीजफायर के बीच पाकिस्तान की भूमिका पर बड़े सवाल उठने लगे हैं। अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि पाकिस्तान कई वर्षों से ईरानी सैन्य विमानों को अपने एयरबेस पर शरण देता रहा है। हालिया सैटेलाइट तस्वीरों में भी पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस पर ईरानी विमान देखे गए हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अप्रैल 2026 में अमेरिका-ईरान संघर्ष तेज होने के बाद ईरान ने अपने कुछ सैन्य और सपोर्ट एयरक्राफ्ट पाकिस्तान भेज दिए थे ताकि संभावित अमेरिकी एयरस्ट्राइक से उन्हें बचाया जा सके। CBS News और अन्य मीडिया संस्थानों ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दावा किया कि पाकिस्तान ने “मध्यस्थ” की भूमिका निभाते हुए भी ईरानी विमानों को सुरक्षित जगह उपलब्ध कराई।
NDTV की एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में कहा गया कि यह सिर्फ हाल की घटना नहीं है। 2025 के एक वीडियो और अन्य विजुअल सबूतों में भी कराची एयरपोर्ट पर ईरानी टैंकर और सैन्य विमान दिखाई दिए थे। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान लंबे समय से ईरानी विमानों को अस्थायी शरण देता रहा है, खासकर तब जब तेहरान किसी सैन्य दबाव में होता है।
हालांकि पाकिस्तान सरकार ने इन आरोपों को “भ्रामक और सनसनीखेज” बताया है। इस्लामाबाद ने माना कि कुछ ईरानी विमान पाकिस्तान में मौजूद थे, लेकिन कहा कि उन्हें सैन्य ऑपरेशन के लिए नहीं बल्कि विशेष परिस्थितियों में अस्थायी रूप से रोका गया था।
इस खुलासे के बाद अमेरिका में भी पाकिस्तान की भूमिका पर बहस तेज हो गई है। अमेरिकी सीनेटर Lindsey Graham ने पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर वह ईरानी विमानों को संरक्षण दे रहा था, तो वह निष्पक्ष मध्यस्थ कैसे हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान और ईरान के रिश्ते केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि रणनीतिक और सैन्य स्तर पर भी गहरे रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स में 1971 युद्ध का भी जिक्र किया गया है, जब ईरान ने पाकिस्तान की सैन्य संपत्तियों को शरण दी थी। अब माना जा रहा है कि पाकिस्तान उसी “पुराने एहसान” को लौटा रहा है।