लद्दाख हिंसा की बरसी पर गरमाया सियासी माहौल, सोनम वांगचुक ने मांगा अमित शाह का इस्तीफा…

लेह में 20 किमी मार्च के बाद सभा में बोले वांगचुक- पिछले साल की हिंसा की जिम्मेदारी तय हो, न्यायिक जांच रिपोर्ट भी सार्वजनिक की जाए

लेह। लद्दाख में पिछले साल हुई हिंसा की पहली बरसी पर एक बार फिर सियासी और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। लेह में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण कार्यकर्ता और लद्दाख एपेक्स बॉडी (LAB) के नेता सोनम वांगचुक ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने 24 सितंबर 2025 की हिंसा में चार लोगों की मौत का जिक्र करते हुए इसके लिए राजनीतिक जिम्मेदारी तय करने की मांग उठाई।

वांगचुक ने यह मांग लेह में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए की। इससे पहले उन्होंने चार मृतकों की स्मृति में करीब 20 किलोमीटर के मार्च का नेतृत्व किया। इस दौरान लद्दाख के लिए राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा समेत लंबे समय से उठाई जा रही मांगें भी प्रमुखता से सामने आईं।

‘अमित शाह जिम्मेदारी लें और इस्तीफा दें’

सभा में वांगचुक ने पिछले साल हुई हिंसा को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर सीधे राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि लद्दाख में हुई मौतों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और इसी आधार पर अमित शाह को इस्तीफा देना चाहिए।

वांगचुक ने यह भी कहा कि लद्दाख के लोगों ने भारत को लोकतंत्र और संवैधानिक अधिकारों में विश्वास के कारण चुना था। उन्होंने केंद्र और लद्दाख के लोगों के बीच विश्वास बहाली के लिए ‘डर और दबाव’ की जगह संवाद और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्राथमिकता देने की बात कही।

छठी अनुसूची का मुद्दा फिर उठा

वांगचुक ने अपने संबोधन में लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा देने के मुद्दे को भी उठाया। उनका दावा है कि इस संबंध में पहले आश्वासन दिए गए थे, लेकिन बाद में केंद्र की ओर से इस मांग पर पीछे हटने की स्थिति बनी।

उन्होंने कहा कि यदि लद्दाख की संवैधानिक और राजनीतिक मांगों पर समय रहते समाधान किया गया होता तो आंदोलन को इस स्तर तक जाने की जरूरत नहीं पड़ती। यह वांगचुक का राजनीतिक आरोप है, जबकि केंद्र की ओर से लद्दाख की संवैधानिक मांगों को लेकर अलग-अलग स्तर पर बातचीत और प्रस्तावों की प्रक्रिया जारी रही है।

न्यायिक जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग

पिछले साल की हिंसा की जांच के लिए गठित न्यायिक आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग भी कार्यक्रम में प्रमुखता से उठी। वांगचुक ने कहा कि एक साल बीत जाने के बावजूद जांच के निष्कर्षों का सार्वजनिक होना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि यदि रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई तो स्वतंत्र स्तर पर ‘पीपुल्स ट्रिब्यूनल’ गठित कर घटना की पड़ताल करने की मांग उठाई जाएगी।

पिछले साल क्या हुआ था?

24 सितंबर 2025 को लेह में राज्य के दर्जे और संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा समेत विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन हुआ था। प्रदर्शन के दौरान स्थिति हिंसक हो गई और पुलिस फायरिंग में चार लोगों की मौत हुई तथा कई लोग घायल हुए। इस घटना के बाद मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए गए थे।

घटना की पहली बरसी पर लेह और लद्दाख के कई हिस्सों में बंद भी देखा गया। कार्यक्रमों में पिछले साल मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी गई और उनके लिए न्याय की मांग दोहराई गई।

लद्दाख पुलिस ने आरोपों को बताया गलत

वांगचुक ने कार्यक्रम में सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए। दूसरी ओर, लद्दाख पुलिस ने इन आरोपों को गलत और भ्रामक बताया। पुलिस के मुताबिक श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शामिल होने से किसी व्यक्ति को नहीं रोका गया था। पुलिस ने कहा कि कार्यक्रम के दौरान लगाए गए बैरिकेड और सुरक्षा इंतजाम भीड़ तथा यातायात प्रबंधन के लिए किए गए थे।

20 लोगों के खिलाफ केस वापस लेने की घोषणा

हिंसा की बरसी से एक दिन पहले लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने इस मामले से जुड़े 20 लोगों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को वापस लेने की मंजूरी दी थी। रिपोर्टों के मुताबिक कुल 87 लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए थे और केस वापस लेना आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों की प्रमुख मांगों में शामिल रहा है।

इस बीच वांगचुक ने अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि उन्हें अपनी जान को खतरा होने की चेतावनियां मिली हैं। हालांकि, इस संबंध में उनके दावों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

लद्दाख में हुई पिछले साल की हिंसा की बरसी पर वांगचुक का अमित शाह के इस्तीफे की मांग करना एक बार फिर केंद्र और लद्दाख के बीच लंबित संवैधानिक एवं राजनीतिक मुद्दों को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ले आया है। अब सबकी नजर न्यायिक जांच के निष्कर्षों और केंद्र-लद्दाख संवाद में आगे होने वाली प्रगति पर है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *