समय पर इलाज़ से कुष्ठ रोगी जी रहे सामान्य जीवन…

शरीर पर सफेद या सुन्न चकत्ते, सुन्नपन या पलक बंद न होने जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत कराएं जांच; सरकारी अस्पतालों में इलाज पूरी तरह निःशुल्क

महासमुंद। जिले में राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के तहत समय पर पहचान, उपचार और पुनर्वास की प्रभावी व्यवस्था से कुष्ठ रोगी अब सामान्य और सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं। कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के निर्देशन एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आई. नागेश्वर राव के मार्गदर्शन में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

इसी अभियान के तहत विकासखंड बागबाहरा के एक मरीज, जो पहले बाईं आंख में लैगोफ्थाल्मोस (पलक बंद न होना) और दाएं हाथ में ग्रेड-2 विकृति से पीड़ित थे, अब पूरी तरह सामान्य जीवन जी रहे हैं। सामाजिक संकोच और भय के कारण उन्होंने लंबे समय तक जांच नहीं कराई थी, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की पहल से उनका समय पर उपचार शुरू हुआ।

नियमित इलाज से मिला नया जीवन

जिला कुष्ठ अधिकारी डॉ. वी.पी. सिंह एवं जिला कार्यक्रम प्रबंधक श्रीमती नीलू धृतलहरे के समन्वय में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बागबाहरा की टीम ने मरीज से संपर्क कर उपचार शुरू कराया। सीएचसी बागबाहरा के मिनिकेतन चौधरी और उनकी टीम ने नियमित मल्टी ड्रग थेरेपी (एमडीटी), आंखों की विशेष देखभाल, हाथों की सेल्फ-केयर ट्रेनिंग और लगातार फॉलो-अप सुनिश्चित किया।

नियमित दवा और स्वयं की देखभाल के कारण मरीज की आंख पूरी तरह स्वस्थ हो गई और हाथ की विकृति में भी काफी सुधार हुआ। अब वह बिना किसी डर या संकोच के दोबारा खेती-किसानी का काम कर रहे हैं।

‘कुष्ठ रोग लाइलाज नहीं, समय पर इलाज कराएं’

उपचारित व्यक्ति ने कहा कि पहले उन्हें लगता था कि कुष्ठ रोग होने का मतलब जीवन समाप्त हो जाना है, लेकिन डॉक्टरों और स्वास्थ्य टीम के सहयोग से उनका यह भ्रम दूर हुआ। उन्होंने लोगों से अपील की कि बीमारी के लक्षण दिखते ही बिना डर के इलाज कराएं, क्योंकि समय पर उपचार से पूरी तरह सामान्य जीवन जिया जा सकता है।

लक्षण दिखें तो तुरंत स्वास्थ्य केंद्र पहुंचें

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आई. नागेश्वर राव ने कहा कि समय पर पहचान, सही उपचार और नियमित सेल्फ-केयर से कुष्ठ जनित विकलांगता को रोका जा सकता है।

वहीं जिला कुष्ठ अधिकारी डॉ. वी.पी. सिंह ने लोगों से अपील की कि यदि शरीर पर सफेद या सुन्न चकत्ते, सुन्नपन या पलक बंद न होने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं। उन्होंने बताया कि सरकारी अस्पतालों में कुष्ठ रोग का इलाज पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध है।

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