वृंदावन की सुदामा कुटी में बोले मोहन भागवत: जैसे-जैसे हम एक होंगे, उनके टुकड़े होंगे…

उत्तर प्रदेश। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत उत्तर प्रदेश के वृंदावन स्थित प्रसिद्ध सुदामा कुटी पहुंचे हैं। यहां वे 10 दिन तक चलने वाले धार्मिक-सामाजिक महोत्सव में शामिल होने आए हैं। इसी दौरान अपने संबोधन में उन्होंने समाज को तोड़ने वाली ताकतों पर तीखा हमला बोला।

भागवत ने कहा जैसे-जैसे हम एकजुट होंगे, वैसे-वैसे उनके टुकड़े होते जाएंगे। वे अंदर से खोखले हो चुके हैं और आज पूरी दुनिया में हार रहे हैं।

RSS प्रमुख सुदामा कुटी में आयोजित महामहोत्सव और संत समागम में भाग लेने पहुंचे हैं। यह आयोजन सेवा, समरसता और आध्यात्मिक चेतना को समर्पित है, जिसमें देश-भर से संत, सामाजिक कार्यकर्ता और स्वयंसेवक शामिल हो रहे हैं।

इस महोत्सव में देश के 4 राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल होंगे। साथ ही
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
को भी आमंत्रण भेजा गया है।
2025 में इस कुटी में द्रौपदी मुर्मू भी पहुंच चुकी हैं। वे दिल्ली से विशेष ट्रेन द्वारा वृंदावन आई थीं।

वृंदावन में यमुना किनारे विशेष पूजास्थल और सेवा केंद्र तैयार किए गए हैं। यहां प्रतिदिन करीब 10 हजार लोगों को नि:शुल्क भोजन कराया जाएगा। सुदामा कुटी के बारे में मान्यता है कि कोई भी यहां से भूखा नहीं लौटता, क्योंकि संतों और जरूरतमंदों की सेवा 24 घंटे चलती रहती है।

बड़े संतों का जमावड़ा,,

इस महामहोत्सव में देश के प्रमुख संतों को आमंत्रित किया गया है, जिनमें बाबा रामदेव, बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री, जूना अखाड़ा से महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि, कैलाशा नंद गिरि महाराज
जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज शामिल हैं।

सुदामा कुटी की स्थापना सुदामादास महाराज ने वर्ष 1926 में की थी। यह आश्रम बंसीवट और गोपेश्वर महादेव मंदिर के बीच स्थित है।
सुदामादास महाराज का जन्म 1899 में बिहार के गोपालगंज जिले के छपिया गांव में हुआ था। वे पहले अयोध्या में रहे, फिर 1926 में वृंदावन आए और जीवन भर संत सेवा में जुटे रहे। यहां सुबह से शाम तक भजन-कीर्तन और गौसेवा होती है।

RSS प्रमुख ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि संघ का उद्देश्य किसी के खिलाफ लड़ना नहीं, बल्कि समाज को जोड़ना है। उन्होंने कहा कि जब समाज संगठित होता है, तो विभाजनकारी विचारधाराएं अपने आप कमजोर पड़ जाती हैं।

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