वैज्ञानिकों ने लैब में बनाया ‘SpudCell’, कृत्रिम कोशिका ने खुद बढ़कर और विभाजित होकर रचा इतिहास…

सिंथेटिक बायोलॉजी में बड़ी सफलता, बिना किसी जीवित कोशिका के रसायनों और कृत्रिम डीएनए से तैयार की गई सेल; भविष्य में दवा, जैव-ईंधन और पर्यावरण के क्षेत्र में खुल सकते हैं नए रास्ते।

वैज्ञानिकों ने सिंथेटिक बायोलॉजी के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए प्रयोगशाला में पूरी तरह कृत्रिम डीएनए और रासायनिक घटकों से ऐसी कोशिका तैयार की है, जो भोजन ग्रहण कर सकती है, बढ़ सकती है, अपना डीएनए कॉपी कर सकती है और विभाजित होकर नई कोशिका बना सकती है। इस नई कृत्रिम कोशिका को ‘SpudCell’ नाम दिया गया है। यह उपलब्धि जीवन की मूल प्रक्रियाओं को समझने और भविष्य में जैव-प्रौद्योगिकी के नए अनुप्रयोग विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

यह शोध अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा की वैज्ञानिक Kate Adamala और उनकी टीम ने किया है। SpudCell को किसी जीवित कोशिका में बदलाव करके नहीं, बल्कि पूरी तरह गैर-जीवित रासायनिक अवयवों, लिपिड झिल्ली और कृत्रिम डीएनए से बनाया गया है।

शोधकर्ताओं के अनुसार SpudCell अभी पूरी तरह “जीवित” नहीं है, क्योंकि यह कुछ आवश्यक जैविक मशीनरी और पोषक तत्वों के लिए बाहरी सहायता पर निर्भर है। इसके बावजूद यह पहली बार है जब प्रयोगशाला में तैयार किसी कृत्रिम कोशिका ने जीवन-चक्र जैसी प्रमुख प्रक्रियाओं—वृद्धि, डीएनए प्रतिकृति और कोशिका विभाजन—का प्रदर्शन किया है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तकनीक से भविष्य में नई दवाओं का विकास, जैव-ईंधन का उत्पादन, पर्यावरण-अनुकूल औद्योगिक प्रक्रियाएं और जीवन की उत्पत्ति से जुड़े वैज्ञानिक सवालों के जवाब खोजने में मदद मिल सकती है। हालांकि विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया है कि SpudCell अभी स्वायत्त जीव नहीं है और इसे पूरी तरह स्वतंत्र रूप से कार्य करने योग्य बनाने के लिए अभी और शोध की आवश्यकता है।

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