बिहार। चांदी थाना क्षेत्र के भगवतपुर गांव में 20 दिसंबर 2025 की रात एक सनसनीखेज हत्या का खुलासा हुआ है। यहां रहने वाले पशुपतिनाथ तिवारी (लगभग 60 वर्ष), जो झारखंड पुलिस में चालक हवलदार थे, को उनके अपने बेटे विशाल कुमार तिवारी और उसके दोस्त मो. जिशान अहमद जिलानी ने बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया। दोनों आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
पशुपतिनाथ तिवारी जनवरी 2026 में सेवानिवृत्त होने वाले थे तथा छुट्टियों में अपने पैतृक गांव भगवतपुर आए थे। 19 दिसंबर की रात वे घर के बरामदे में सो रहे थे, तभी उनके बेटे विशाल और उसका दोस्त जिशान रात करीब डेढ़ बजे वहां पहुंचे। पुलिस के मुताबिक दोनों ने चाकू से उन्हें हमला कर हत्या कर दी।
उसे लगता था कि अगर उसके पिता की सेवा के दौरान मौत हो जाती तो उसे अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी मिल जाएगी, क्योंकि पिता एक पुलिसकर्मी थे।
वह पिता की संपत्ति अकेले लेना चाहता था और उसकी बहन को नहीं देना चाहता था, जिससे हत्या के बाद अंगूठा काटे जाने की भी बात सामने आई है।
विशाल ने पुलिस के सामने यह भी कहा कि उसे लगता था कि वह “किसी भी लायक नहीं है, कुछ नहीं कर सकता” और उसने सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए यह कदम उठाया” यह कबूलनामा स्थानीय पुलिस के पूछताछ में सामने आया है।
विशाल दो साल पहले भी अपने पिता को बाइक एक्सीडेंट के माध्यम से मारने की साजिश रच चुका था, लेकिन वह असफल रहा। हत्या के बाद बचने के लिए दोनों आरोपी चाकू और दस्ताने सोन नदी में फेंक दिया।
पिता-पुत्र के बीच नशे और संपत्ति विवाद को भी पुलिस प्रमुख कारण मान रही है। चांदी थाना क्षेत्र के पुलिस ने विशाल तिवारी और उसके दोस्त जिशान को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया है। हत्या का मामला धारा के तहत दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच जारी है।
घटना ने इलाके में गहरा आघात उत्पन्न किया है और यह सवाल उठा दिया है कि कैसे एक युवक पिता के प्रति ऐसा कदम उठा सकता है, सिर्फ नौकरी और संपत्ति के लालच में। कई सामाजिक समूहों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और इंसानों तथा परिवारों के रिश्तों की मर्यादा पर चर्चा शुरू हो गई है।